DocShare
Science and Technology (SSC, Railway, Police & All State exam)Chapter Unit

प्रक्षेपण यान

1. प्रक्षेपण यान क्या है?

  • प्रक्षेपण यान (Launch Vehicle):
    • प्रक्षेपण यान एक ऐसा वाहन है जो उपग्रहों या अंतरिक्ष यानों को पृथ्वी की कक्षा (Orbit) या उससे आगे अंतरिक्ष में प्रक्षेपित करता है।
    • यह रॉकेट आधारित तकनीक पर काम करता है।

2. प्रक्षेपण यान के प्रकार

  1. भौतिक आधार पर वर्गीकरण:

    • एकल चरण प्रक्षेपण यान (Single-Stage Launch Vehicle):
      • केवल एक चरण (Stage) का उपयोग करता है।
      • यह सामान्यतः छोटे मिशनों के लिए उपयोग किया जाता है।
    • बहु-चरण प्रक्षेपण यान (Multi-Stage Launch Vehicle):
      • इसमें एक से अधिक चरण होते हैं। प्रत्येक चरण अलग-अलग ईंधन और इंजन पर काम करता है।
      • जैसे: PSLV, GSLV।
  2. ईंधन के आधार पर वर्गीकरण:

    • तरल ईंधन प्रक्षेपण यान (Liquid Fuel Launch Vehicle):
      • तरल ईंधन का उपयोग करता है।
      • इसे नियंत्रित और पुनः भरा जा सकता है।
    • ठोस ईंधन प्रक्षेपण यान (Solid Fuel Launch Vehicle):
      • ठोस ईंधन का उपयोग करता है।
      • यह सरल और सस्ता होता है, लेकिन इसे नियंत्रित करना मुश्किल है।
    • हाइब्रिड ईंधन प्रक्षेपण यान (Hybrid Fuel Launch Vehicle):
      • ठोस और तरल दोनों प्रकार के ईंधनों का उपयोग करता है।
  3. लक्ष्य के आधार पर वर्गीकरण:

    • पृथ्वी कक्षा प्रक्षेपण यान (Earth-Orbit Launch Vehicle):
      • उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करता है।
    • अंतरग्रहीय प्रक्षेपण यान (Interplanetary Launch Vehicle):
      • अंतरिक्ष यानों को पृथ्वी की कक्षा से बाहर भेजता है, जैसे चंद्रमा और मंगल मिशन।

3. प्रक्षेपण यान की संरचना

प्रक्षेपण यान निम्नलिखित प्रमुख घटकों से मिलकर बना होता है:

  1. ईंधन टैंक (Fuel Tank):
    • ईंधन को संग्रहीत करता है, जैसे ठोस, तरल, या हाइब्रिड ईंधन।
  2. इंजन (Engine):
    • रॉकेट को बल (Thrust) प्रदान करता है।
  3. पेलोड (Payload):
    • वह हिस्सा जिसमें उपग्रह या अंतरिक्ष यान होता है।
  4. प्रणोदन प्रणाली (Propulsion System):
    • प्रक्षेपण यान को कक्षा तक पहुँचाने के लिए आवश्यक बल उत्पन्न करता है।
  5. नेविगेशन और नियंत्रण प्रणाली (Navigation and Control System):
    • यान की दिशा और गति को नियंत्रित करता है।

4. भारत के प्रमुख प्रक्षेपण यान

भारत ने समय के साथ कई प्रक्षेपण यानों का विकास किया है:

  1. SLV (Satellite Launch Vehicle):

    • भारत का पहला प्रक्षेपण यान।
    • पहला सफल प्रक्षेपण: 1980 (रोहिणी उपग्रह)।
    • विशेषता:
      • ठोस ईंधन पर आधारित।
      • केवल छोटे पेलोड ले जाने की क्षमता।
  2. ASLV (Augmented Satellite Launch Vehicle):

    • SLV का उन्नत संस्करण।
    • पहला सफल प्रक्षेपण: 1992।
    • विशेषता:
      • मध्यम पेलोड क्षमता।
      • ठोस ईंधन पर आधारित।
  3. PSLV (Polar Satellite Launch Vehicle):

    • पहला सफल प्रक्षेपण: 1994।
    • विशेषता:
      • बहु-चरणीय यान।
      • ठोस और तरल ईंधन का उपयोग।
      • पृथ्वी की ध्रुवीय कक्षा में उपग्रह प्रक्षेपित करने में सक्षम।
      • उपलब्धि:
        • 2017 में, PSLV ने एक मिशन में 104 उपग्रहों का प्रक्षेपण कर विश्व रिकॉर्ड बनाया।

भारत के प्रमुख प्रक्षेपण यान

प्रक्षेपण यानपहला प्रक्षेपणईंधन प्रकारप्रमुख उपयोग
SLV1980ठोस ईंधनछोटे पेलोड प्रक्षेपण
ASLV1992ठोस ईंधनमध्यम पेलोड प्रक्षेपण
PSLV1994ठोस और तरल ईंधनध्रुवीय कक्षा में उपग्रह प्रक्षेपण

5. भारत के उन्नत प्रक्षेपण यान

  1. GSLV (Geosynchronous Satellite Launch Vehicle):

    • पहला सफल प्रक्षेपण: 2001।
    • विशेषता:
      • भूस्थिर कक्षा में भारी उपग्रहों को प्रक्षेपित करने में सक्षम।
      • तरल और क्रायोजेनिक (अत्यधिक ठंडे) ईंधन का उपयोग।
    • प्रमुख मिशन:
      • GSAT श्रृंखला के उपग्रहों का प्रक्षेपण।
      • चंद्रयान-2 मिशन।
  2. GSLV Mk III (LVM-3):

    • भारत का सबसे शक्तिशाली प्रक्षेपण यान।
    • पहला सफल प्रक्षेपण: 2014।
    • विशेषता:
      • 4 टन तक के भारी पेलोड को भूस्थिर कक्षा में और 10 टन तक के पेलोड को निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में ले जाने में सक्षम।
      • स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन का उपयोग।
    • प्रमुख मिशन:
      • चंद्रयान-2 और गगनयान।
      • 36 वनवेब उपग्रहों का प्रक्षेपण (2023)।
  3. SSLV (Small Satellite Launch Vehicle):

    • पहला प्रक्षेपण: 2022।
    • विशेषता:
      • छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए विकसित।
      • कम लागत और तेज़ लॉन्च प्रक्रिया।
    • उपयोग:
      • 500 किलोग्राम तक के छोटे पेलोड के लिए आदर्श।

6. प्रक्षेपण यान के प्रमुख चरण

भारत के प्रक्षेपण यानों में विभिन्न चरण होते हैं:

  1. पहला चरण (First Stage):
    • ठोस या तरल ईंधन आधारित।
    • यान को शुरुआती बल (Thrust) प्रदान करता है।
  2. दूसरा चरण (Second Stage):
    • तरल ईंधन आधारित।
    • यान की गति और दिशा को नियंत्रित करता है।
  3. तीसरा चरण (Third Stage):
    • ठोस या क्रायोजेनिक ईंधन आधारित।
    • पेलोड को वांछित कक्षा में पहुँचाने का अंतिम कार्य करता है।

7. भारत की उपलब्धियाँ

  1. PSLV की बहुआयामी सफलता:

    • 1994 से अब तक 50+ सफल प्रक्षेपण।
    • भारत और अन्य देशों के 300 से अधिक उपग्रह प्रक्षेपित किए।
  2. GSLV की क्रायोजेनिक तकनीक:

    • स्वदेशी तकनीक के माध्यम से 2 टन से अधिक भारी उपग्रहों का प्रक्षेपण।
  3. लघु प्रक्षेपण के लिए SSLV:

    • छोटे और तीव्र मिशनों के लिए उपयोगी।

उन्नत प्रक्षेपण यान

प्रक्षेपण यानपहला प्रक्षेपणईंधन प्रकारक्षमताप्रमुख मिशन
GSLV2001तरल और क्रायोजेनिक2.5 टन (GTO)GSAT श्रृंखला
GSLV Mk III2014क्रायोजेनिक और ठोस4 टन (GTO)चंद्रयान-2, गगनयान
SSLV2022ठोस ईंधन500 किलोग्राम (LEO)छोटे उपग्रह मिशन

8. भारत के प्रमुख मिशन और प्रक्षेपण यान की भूमिका

  1. चंद्रयान मिशन:
    • चंद्रयान-1: PSLV का उपयोग।
    • चंद्रयान-2: GSLV Mk III का उपयोग।
  2. मंगलयान (Mangalyaan):
    • PSLV द्वारा 2013 में प्रक्षेपित।
    • पहली कोशिश में सफल मंगल मिशन।
  3. गगनयान (Gaganyaan):
    • GSLV Mk III (LVM-3) का उपयोग।
    • पहला मानव अंतरिक्ष मिशन।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग

  • भारत ने PSLV और GSLV के माध्यम से कई अंतरराष्ट्रीय उपग्रहों का प्रक्षेपण किया।
  • वनवेब मिशन (2023): GSLV Mk III द्वारा 36 उपग्रहों का प्रक्षेपण।

9. प्रक्षेपण यानों की डिजाइन और प्रौद्योगिकी में उन्नति

भारत में प्रक्षेपण यान तकनीक में निरंतर सुधार हुआ है। इसरो ने नवीनतम तकनीकों को अपनाकर प्रक्षेपण यानों की दक्षता बढ़ाई है।

  1. क्रायोजेनिक इंजन:

    • अत्यधिक ठंडे तापमान (Cryogenic Temperatures) पर काम करने वाले इंजन।
    • GSLV और GSLV Mk III में उपयोग।
    • स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन विकास ने भारत को भारी उपग्रह प्रक्षेपण में आत्मनिर्भर बनाया।
  2. रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल (RLV):

    • पुन: उपयोग योग्य प्रक्षेपण यान, जो मिशन लागत को कम करेगा।
    • इसरो का प्रायोगिक परीक्षण 2016 में सफल रहा।
    • उद्देश्य:
      • पुन: उपयोग योग्य यानों का विकास करना, जैसे स्पेसएक्स का फाल्कन रॉकेट।
  3. हाइब्रिड प्रक्षेपण तकनीक:

    • ठोस और तरल ईंधन का संयोजन।
    • यह PSLV की बहु-चरणीय तकनीक में देखा गया है।
  4. नैनो और क्यूबसैट प्रक्षेपण:

    • छोटे उपग्रहों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए SSLV और PSLV का उपयोग।
    • लागत कम और समय बचाने के लिए छोटे प्रक्षेपण यानों का विकास।

10. भारत के अंतरिक्ष में भविष्य की योजनाएँ

  1. गगनयान मिशन:

    • भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन, जिसमें GSLV Mk III का उपयोग किया जाएगा।
    • लक्ष्य: 2025 तक तीन अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की कक्षा में भेजना।
  2. अंतरिक्ष स्टेशन (Space Station):

    • इसरो ने 2030 तक एक छोटा अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की योजना बनाई है।
    • उद्देश्य: दीर्घकालिक अंतरिक्ष अनुसंधान।
  3. शुक्र ग्रह मिशन (Shukrayaan):

    • शुक्र ग्रह का अध्ययन करने के लिए योजना।
    • GSLV Mk III का उपयोग किया जाएगा।
  4. अन्य मिशन:

    • चंद्रयान-3: चंद्रमा की सतह पर रोवर और लैंडर स्थापित करने के लिए।
    • आदित्य-एल1: सूर्य के कोरोना और सौर गतिविधियों का अध्ययन।

11. प्रक्षेपण यान और वैश्विक प्रतिस्पर्धा

  1. निजी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा:

    • स्पेसएक्स (SpaceX), ब्लू ओरिजिन, और यूरोपियन एरियनस्पेस के बढ़ते प्रभाव के साथ, इसरो ने भी SSLV और RLV जैसी परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया।
  2. अंतरराष्ट्रीय उपग्रह प्रक्षेपण:

    • भारत ने PSLV और GSLV के माध्यम से 30+ देशों के उपग्रह प्रक्षेपित किए हैं।
    • कम लागत और उच्च विश्वसनीयता के कारण भारत "दुनिया का लॉन्चपैड" बन रहा है।

12. प्रक्षेपण यान की चुनौतियाँ

  1. तकनीकी चुनौतियाँ:
    • क्रायोजेनिक तकनीक का परिष्करण।
    • अत्यधिक जटिल चरणों के बीच समन्वय।
  2. लागत और समय:
    • छोटे और तीव्र प्रक्षेपणों के लिए अधिक निवेश की आवश्यकता।
  3. मलबा और पर्यावरणीय प्रभाव:
    • रॉकेट उत्सर्जन और अंतरिक्ष मलबा बढ़ती चिंताएँ हैं।

इसरो के प्रमुख प्रक्षेपण यान

प्रक्षेपण यानलॉन्च क्षमता (LEO)लॉन्च क्षमता (GTO)प्रमुख मिशन
PSLV1,750 किग्रा1,425 किग्राचंद्रयान-1, मंगलयान
GSLV5,000 किग्रा2,500 किग्राGSAT-7A, GSAT-19
GSLV Mk III10,000 किग्रा4,000 किग्राचंद्रयान-2, गगनयान
SSLV500 किग्रा-छोटे उपग्रह मिशन

निष्कर्ष

भारत के प्रक्षेपण यान न केवल देश को अंतरिक्ष में आत्मनिर्भर बना रहे हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर कम लागत और उच्च गुणवत्ता के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। आगामी मिशन, जैसे गगनयान और अंतरिक्ष स्टेशन, भारत को अंतरिक्ष अनुसंधान में नई ऊँचाइयों पर पहुँचाएँगे।


Unlock Full Unit & Study Features

Sign in to highlight text, create saved notes, ask the AI Tutor questions, and access all units.