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Physics (SSC, Railway, Police & All State exam)Chapter Unit

गुरुत्वाकर्षण (Gravitation)

गुरुत्वाकर्षण का परिचय:

गुरुत्वाकर्षण वह बल है जो सभी वस्तुओं को एक-दूसरे की ओर आकर्षित करता है। यह बल भौतिक ब्रह्मांड की सबसे मौलिक ताकतों में से एक है, और इसे सर्वप्रथम सर आइजैक न्यूटन ने परिभाषित किया था।


गुरुत्वाकर्षण का सार्वभौम नियम (Universal Law of Gravitation):

गुरुत्वाकर्षण के सार्वभौमिक नियम के अनुसार:

F=Gm1⋅m2r2F = G \frac{m_1 \cdot m_2}{r^2}F=Gr2m1​⋅m2​​

जहाँ:

  • FFF: गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitational Force)
  • GGG: गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक (Gravitational Constant), 6.674×10−11 Nm2/kg26.674 \times 10^{-11} \, \text{Nm}^2/\text{kg}^26.674×10−11Nm2/kg2
  • m1m_1m1​ और m2m_2m2​: दो वस्तुओं के द्रव्यमान
  • rrr: दोनों वस्तुओं के केंद्रों के बीच की दूरी

गुरुत्वाकर्षण बल की विशेषताएँ:

  1. यह आकर्षण का बल है।
  2. बल वस्तुओं के द्रव्यमान के समानुपाती होता है।
  3. बल, वस्तुओं के बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
  4. यह बल वस्तुओं के केंद्रों के बीच कार्य करता है।

पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण:

पृथ्वी अपने केंद्र की ओर सभी वस्तुओं पर आकर्षण बल लगाती है। इसे पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल कहा जाता है।

पृथ्वी पर गुरुत्वीय त्वरण (Acceleration due to Gravity):

पृथ्वी पर सभी वस्तुएं 9.8 m/s29.8 \, \text{m/s}^29.8m/s2 की दर से त्वरण करती हैं। इसे ggg से दर्शाया जाता है।

ggg का मान:
g=GMR2g = G \frac{M}{R^2}g=GR2M​

जहाँ:

  • GGG: गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक
  • MMM: पृथ्वी का द्रव्यमान (5.972×1024 kg5.972 \times 10^{24} \, \text{kg}5.972×1024kg)
  • RRR: पृथ्वी की त्रिज्या (6.371×106 m6.371 \times 10^6 \, \text{m}6.371×106m)

गुरुत्वीय बल का महत्व:

  1. पृथ्वी पर वस्तुओं का वजन गुरुत्वीय बल के कारण है।
  2. ग्रह, तारे, और उपग्रह अपनी कक्षाओं में गुरुत्वाकर्षण बल के कारण रहते हैं।
  3. समुद्र में ज्वार-भाटा चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण उत्पन्न होते हैं।

वजन और द्रव्यमान में अंतर:

विशेषताद्रव्यमान (Mass)वजन (Weight)
परिभाषावस्तु में पदार्थ की कुल मात्रा।गुरुत्वीय बल जो वस्तु पर कार्य करता है।
SI इकाईकिलोग्राम (kg)न्यूटन (N)
स्थिरतास्थान बदलने से द्रव्यमान नहीं बदलता।स्थान बदलने पर वजन बदलता है।
सूत्र—W=m⋅gW = m \cdot gW=m⋅g

गुरुत्वाकर्षण बल का प्रभाव:

  1. ग्रहों की गति पर:
    • सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल ग्रहों को उनकी कक्षाओं में बनाए रखता है।
  2. उपग्रहों पर:
    • पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल कृत्रिम उपग्रहों को कक्षा में बनाए रखता है।
  3. पृथ्वी पर वस्तुओं की गति पर:
    • गिरती हुई वस्तु का त्वरण ggg के कारण होता है।

गुरुत्वीय त्वरण (( g )) के मान को प्रभावित करने वाले कारक:

गुरुत्वीय त्वरण (( g )) का मान पृथ्वी पर विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग हो सकता है। इसे निम्नलिखित कारक प्रभावित करते हैं:

  1. पृथ्वी का आकार और स्थान:

    • पृथ्वी पूरी तरह गोलाकार नहीं है; यह ध्रुवों पर चपटी और भूमध्य रेखा पर उभरी हुई है।
    • ध्रुवों पर ( g ): अधिक होता है (त्रिज्या कम होने के कारण)।
    • भूमध्य रेखा पर ( g ): कम होता है (त्रिज्या अधिक होने के कारण)।
  2. ऊँचाई का प्रभाव:

    • जैसे-जैसे ऊँचाई बढ़ती है, ( g ) का मान घटता है।
    • सूत्र: g′=g(1−2hR)g' = g \left(1 - \frac{2h}{R}\right)g′=g(1−R2h​) जहाँ:
      • ( h ): ऊँचाई
      • ( R ): पृथ्वी की त्रिज्या
  3. गहराई का प्रभाव:

    • पृथ्वी के अंदर जाने पर ( g ) का मान घटता है।
    • गहराई ( d ) पर ( g ) का मान: g′=g(1−dR)g' = g \left(1 - \frac{d}{R}\right)g′=g(1−Rd​)
  4. घनत्व का प्रभाव:

    • क्षेत्र की भू-संरचना और घनत्व ( g ) के मान को प्रभावित कर सकते हैं।

गुरुत्वाकर्षण और वस्तुओं की गति:

गुरुत्वाकर्षण बल के कारण वस्तुएं धरती की ओर गिरती हैं। यह गति निम्नलिखित समीकरणों से व्यक्त की जाती है:

मुक्तपतन (Free Fall):
  • जब कोई वस्तु केवल गुरुत्वाकर्षण बल के कारण गिरती है।
  • विस्थापन, वेग, और समय के बीच संबंध:
    1. v=u+g⋅tv = u + g \cdot tv=u+g⋅t
    2. h=u⋅t+12g⋅t2h = u \cdot t + \frac{1}{2} g \cdot t^2h=u⋅t+21​g⋅t2
    3. v2=u2+2g⋅hv^2 = u^2 + 2g \cdot hv2=u2+2g⋅h जहाँ:
    • uuu: प्रारंभिक वेग (Initial Velocity)
    • vvv: अंतिम वेग (Final Velocity)
    • hhh: विस्थापन (Height)
    • ttt: समय (Time)
    • ggg: गुरुत्वीय त्वरण (Acceleration due to Gravity)

चंद्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण:

चंद्रमा पर ggg का मान पृथ्वी की तुलना में बहुत कम होता है। इसका कारण चंद्रमा का कम द्रव्यमान और छोटी त्रिज्या है।

gmoon=GMmoonRmoon2g_{\text{moon}} = G \frac{M_{\text{moon}}}{R_{\text{moon}}^2}gmoon​=GRmoon2​Mmoon​​
पृथ्वी और चंद्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण का अनुपात:
gmoongearth=16\frac{g_{\text{moon}}}{g_{\text{earth}}} = \frac{1}{6}gearth​gmoon​​=61​

इसका मतलब चंद्रमा पर वस्तुएं केवल पृथ्वी के वजन का 16\frac{1}{6}61​ होंगी।


गुरुत्वाकर्षण से जुड़े प्राकृतिक घटनाएँ

  1. ज्वार-भाटा (Tides):

    • सूर्य और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण समुद्र में जलस्तर का उतार-चढ़ाव होता है।
    • चंद्रमा का प्रभाव सूर्य की तुलना में अधिक होता है।
  2. ग्रहों और उपग्रहों की कक्षाएँ:

    • ग्रह, सूर्य के चारों ओर और उपग्रह, ग्रहों के चारों ओर गुरुत्वाकर्षण बल के कारण कक्षा में बने रहते हैं।
  3. वायुमंडल का अस्तित्व:

    • पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल वायुमंडल को बनाए रखता है।

गुरुत्वाकर्षण बल से संबंधित महत्वपूर्ण गणनाएँ

  1. गुरुत्वाकर्षण बल का उदाहरण:

    • प्रश्न: पृथ्वी पर 10 किलोग्राम की दो वस्तुएं 1 मीटर की दूरी पर रखी हैं। इनके बीच का गुरुत्वाकर्षण बल ज्ञात करें।
    • हल: F=Gm1⋅m2r2F = G \frac{m_1 \cdot m_2}{r^2}F=Gr2m1​⋅m2​​ F=(6.674×10−11)10⋅1012F = (6.674 \times 10^{-11}) \frac{10 \cdot 10}{1^2}F=(6.674×10−11)1210⋅10​ F=6.674×10−9 NF = 6.674 \times 10^{-9} \, \text{N}F=6.674×10−9N
    • उत्तर: बल 6.674×10−9 N6.674 \times 10^{-9} \, \text{N}6.674×10−9N है।
  2. चंद्रमा पर वजन का उदाहरण:

    • प्रश्न: पृथ्वी पर किसी वस्तु का वजन 60 N है। चंद्रमा पर इसका वजन ज्ञात करें।
    • हल: Wmoon=Wearth6W_{\text{moon}} = \frac{W_{\text{earth}}}{6}Wmoon​=6Wearth​​ Wmoon=606=10 NW_{\text{moon}} = \frac{60}{6} = 10 \, \text{N}Wmoon​=660​=10N
    • उत्तर: चंद्रमा पर वजन 10 N होगा।

गुरुत्वाकर्षण बल का महत्व:

  1. ग्रहों और तारों का अस्तित्व:
    • गुरुत्वाकर्षण बल के कारण ग्रह और तारे एक साथ जुड़े रहते हैं।
  2. जीवन का आधार:
    • पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल वायुमंडल को बनाए रखता है, जो जीवन के लिए आवश्यक है।
  3. आधुनिक अंतरिक्ष अनुसंधान:
    • रॉकेट और उपग्रहों की कक्षा को नियंत्रित करने के लिए गुरुत्वाकर्षण के नियमों का उपयोग किया जाता है।

कृत्रिम उपग्रह (Artificial Satellites)

कृत्रिम उपग्रह वे यंत्र हैं जिन्हें पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया जाता है। ये गुरुत्वाकर्षण बल के कारण अपनी कक्षा में रहते हैं और विभिन्न उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाते हैं।

उपग्रहों की गति:
  1. कक्षा में गति (Orbital Motion):

    • उपग्रह का वेग गुरुत्वीय बल और केन्द्रापसारक बल के संतुलन के कारण होता है।
    • कक्षीय वेग (Orbital Velocity) का सूत्र:
    vo=GMRv_o = \sqrt{\frac{GM}{R}}vo​=RGM​​

    जहाँ:

    • ( G ): गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक
    • ( M ): पृथ्वी का द्रव्यमान
    • ( R ): पृथ्वी का त्रिज्या + उपग्रह की ऊँचाई
  2. गतिक ऊर्जा:

    K=12mv2K = \frac{1}{2} mv^2K=21​mv2
  3. स्थितिज ऊर्जा:

    U=−GMmRU = -\frac{GMm}{R}U=−RGMm​
  4. यांत्रिक ऊर्जा (Mechanical Energy):

    E=U+K=−GMm2RE = U + K = -\frac{GMm}{2R}E=U+K=−2RGMm​
उपग्रहों की ऊँचाई के आधार पर वर्गीकरण:
  1. निम्न कक्षा उपग्रह (Low Earth Orbit - LEO):

    • ऊँचाई: 200 से 2,000 किमी।
    • उपयोग: निगरानी, मौसम पूर्वानुमान।
  2. मध्य कक्षा उपग्रह (Medium Earth Orbit - MEO):

    • ऊँचाई: 2,000 से 36,000 किमी।
    • उपयोग: नेविगेशन सिस्टम (GPS)。
  3. स्थिर कक्षा उपग्रह (Geostationary Orbit - GEO):

    • ऊँचाई: 36,000 किमी।
    • उपयोग: संचार और प्रसारण।

ज्वार-भाटा (Tides)

ज्वार-भाटा का कारण:
  1. चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल।
  2. सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल (चंद्रमा के बल का लगभग आधा)।
ज्वार-भाटा के प्रकार:
  1. उच्च ज्वार (High Tide):
    • चंद्रमा और सूर्य की ओर पानी का खिंचाव।
  2. निम्न ज्वार (Low Tide):
    • पानी का स्तर कम होना।
ज्वार-भाटा की आवृत्ति:
  • प्रतिदिन दो उच्च और दो निम्न ज्वार आते हैं।
ज्वार-भाटा का उपयोग:
  1. ज्वार-भाटा ऊर्जा उत्पादन।
  2. नौचालन में सहायता।

गुरुत्वाकर्षण और ब्रह्मांडीय घटनाएँ

1. ब्लैक होल (Black Hole):
  • अत्यधिक घनत्व वाले पिंड, जिनका गुरुत्वाकर्षण इतना अधिक होता है कि प्रकाश भी बच नहीं सकता।
2. तारों की गति:
  • गुरुत्वाकर्षण बल तारों को उनके समूह (गैलेक्सी) में बाँध कर रखता है।
3. पृथ्वी का गुरुत्वीय क्षेत्र:
  • पृथ्वी के चारों ओर का क्षेत्र जिसमें गुरुत्वाकर्षण बल कार्य करता है।

गुरुत्वाकर्षण बल से जुड़े रोचक तथ्य

तथ्यविवरण
गुरुत्वाकर्षण बल सबसे कमजोर बल है।लेकिन इसकी पहुँच असीमित होती है।
चंद्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी का ( \frac{1}{6} ) है।इसका मतलब चंद्रमा पर वस्तुएं हल्की महसूस होती हैं।
अंतरिक्ष यात्रियों का भारहीन होना।गुरुत्वाकर्षण के कारण वे लगातार पृथ्वी की कक्षा में "गिरते" रहते हैं।

गुरुत्वाकर्षण का व्यावहारिक उपयोग

  1. अंतरिक्ष विज्ञान:
    • उपग्रह प्रक्षेपण और उनकी कक्षाएँ निर्धारित करने में।
  2. खगोल विज्ञान:
    • ग्रहों, तारों, और गैलेक्सियों के बीच के संबंध को समझने में।
  3. ज्योतिषीय घटनाएँ:
    • ग्रहण और ज्वार-भाटा का पूर्वानुमान।

गुरुत्वाकर्षण का सारांश

विषयपरिभाषा/सूत्र
गुरुत्वाकर्षण बलF=Gm1⋅m2r2F = G \frac{m_1 \cdot m_2}{r^2}F=Gr2m1​⋅m2​​
कक्षीय वेग (Orbital Velocity)vo=GMRv_o = \sqrt{\frac{GM}{R}}vo​=RGM​​
गुरुत्वीय त्वरण (( g ))g=GMR2g = G \frac{M}{R^2}g=GR2M​
यांत्रिक ऊर्जाE=−GMm2RE = -\frac{GMm}{2R}E=−2RGMm​

निष्कर्ष:

गुरुत्वाकर्षण बल भौतिक ब्रह्मांड का एक अनिवार्य हिस्सा है। यह न केवल पृथ्वी पर जीवन को संभव बनाता है, बल्कि खगोल विज्ञान, अंतरिक्ष अनुसंधान, और दैनिक जीवन की कई प्रक्रियाओं को भी नियंत्रित करता है।

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