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Modern India (SSC, Railway, Police & All State exam)Chapter Unit

मराठा (पेशवा)

परिचय: मराठा साम्राज्य 17वीं सदी में छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित किया गया। शिवाजी के बाद उनके उत्तराधिकारियों और पेशवाओं ने इस साम्राज्य को और विस्तार दिया। पेशवा मराठा साम्राज्य के प्रधान मंत्री थे, लेकिन समय के साथ वे वास्तविक शासक बन गए। मराठों का प्रभाव पूरे भारत में फैल गया और वे एक शक्तिशाली शक्ति के रूप में उभरे।


पेशवा पद की स्थापना:

  1. पेशवा का पद मराठा साम्राज्य में प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था।
  2. 1674 में शिवाजी महाराज ने पेशवा पद को अधिक प्रभावशाली बनाया।
  3. पेशवा का मुख्य कार्य प्रशासन और युद्ध संचालन था।
  4. पेशवाओं का मुख्यालय पुणे में था।

प्रमुख पेशवा और उनके कार्य:

  1. बालाजी विश्वनाथ (1713-1720):

    • मराठा साम्राज्य के पहले प्रभावशाली पेशवा।
    • कार्यकाल:
      • मराठों को मुगलों के साथ समझौता करने में मदद की।
      • 1719 में मुगलों से "चौथ" और "सरदेशमुखी" वसूलने का अधिकार प्राप्त किया।
    • उपलब्धियां:
      • मराठा शक्ति को संगठित किया।
      • राजस्व प्रणाली को मजबूत किया।
  2. बाजीराव प्रथम (1720-1740):

    • मराठा साम्राज्य के सबसे प्रसिद्ध पेशवा।
    • कार्यकाल:
      • मराठा शक्ति का उत्तर भारत तक विस्तार किया।
      • मुगलों और निजाम हैदराबाद को पराजित किया।
      • बुंदेलखंड और मालवा जैसे क्षेत्रों में मराठा प्रभुत्व स्थापित किया।
    • विशेषताएं:
      • कुशल सेनापति और रणनीतिकार।
      • उन्होंने कहा, "दिल्ली चलो," और मराठों का दिल्ली पर प्रभाव बढ़ाया।
  3. बालाजी बाजीराव (नाना साहेब) (1740-1761):

    • कार्यकाल:
      • मराठा साम्राज्य की चरम शक्ति का दौर।
      • बंगाल, बिहार और उड़ीसा जैसे क्षेत्रों में मराठा प्रभुत्व स्थापित किया।
    • पतन:
      • 1761 में पानीपत की तीसरी लड़ाई में अहमद शाह अब्दाली के हाथों हार।
      • इस हार से मराठा साम्राज्य कमजोर हो गया।

मराठा साम्राज्य की प्रमुख विशेषताएं:

  1. चौथ और सरदेशमुखी:

    • चौथ: मराठों द्वारा अन्य राज्यों से लिया जाने वाला 25% कर।
    • सरदेशमुखी: कुल राजस्व का 10% कर।
  2. सैन्य शक्ति:

    • मराठा सेना तेज गति और गुरिल्ला युद्ध के लिए प्रसिद्ध थी।
    • घुड़सवार सेना उनकी प्रमुख ताकत थी।
  3. प्रशासनिक व्यवस्था:

    • पेशवाओं ने साम्राज्य को प्रांतों में विभाजित किया।
    • प्रत्येक प्रांत में एक सूबेदार नियुक्त किया गया।
  4. धार्मिक सहिष्णुता:

    • मराठों ने हिंदू धर्म को संरक्षण दिया लेकिन अन्य धर्मों के प्रति सहिष्णुता रखी।

पेशवा के तहत मराठा साम्राज्य का विस्तार और प्रभाव:

  1. मराठा साम्राज्य का चरम:

    • बालाजी बाजीराव के कार्यकाल (1740-1761) में मराठा साम्राज्य अपने चरम पर पहुंचा।
    • मराठों का प्रभाव उत्तर, दक्षिण, पश्चिम और पूर्वी भारत तक फैला।
    • बंगाल, बिहार, ओडिशा, मालवा, गुजरात, और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में मराठा प्रभुत्व स्थापित हुआ।
  2. पानीपत की तीसरी लड़ाई (1761):

    • पृष्ठभूमि:
      • अहमद शाह अब्दाली ने 1757-58 में भारत पर आक्रमण किया और दिल्ली पर कब्जा कर लिया।
      • मराठों ने उसे भारत से बाहर निकालने का प्रयास किया।
    • लड़ाई:
      • 14 जनवरी 1761 को पानीपत के मैदान में मराठों और अब्दाली के बीच निर्णायक लड़ाई हुई।
      • मराठा सेना के प्रमुख सेनानायक सदाशिव राव भाऊ और विष्वासराव मारे गए।
    • परिणाम:
      • मराठा साम्राज्य को भारी नुकसान हुआ।
      • पानीपत की हार ने साम्राज्य को कमजोर कर दिया और अन्य शक्तियों को उभरने का मौका मिला।

पानीपत की लड़ाई के बाद का दौर:

  1. मधवराव प्रथम (1761-1772):

    • पानीपत की हार के बाद मराठा साम्राज्य को पुनर्जीवित किया।
    • कार्यकाल की विशेषताएं:
      • प्रांतों में मराठा प्रभाव बहाल किया।
      • आर्थिक स्थिति को मजबूत किया।
    • उपलब्धियां:
      • निजाम हैदराबाद और मैसूर के खिलाफ सफल युद्ध।
      • मराठा साम्राज्य को आंतरिक और बाहरी चुनौतियों से उभारा।
  2. नारायणराव (1772-1773):

    • बहुत ही कम समय के लिए पेशवा बने।
    • उनके चाचा रघुनाथराव ने उनकी हत्या कर दी।
  3. रघुनाथराव (1773-1774):

    • विवादास्पद पेशवा।
    • उनका कार्यकाल अंग्रेजों के साथ संधि और संघर्ष से भरा रहा।

मराठा संघ का गठन: पानीपत की हार के बाद मराठा साम्राज्य में एक नई संरचना उभरी, जिसे मराठा संघ (Confederacy) कहा गया। इसमें मराठा साम्राज्य को विभिन्न शक्तिशाली परिवारों में बांट दिया गया:

  1. गायकवाड़ (बड़ौदा)
  2. भोंसले (नागपुर)
  3. सिंधिया (ग्वालियर)
  4. होल्कर (इंदौर)
  5. पेशवा (पुणे)

मराठा-अंग्रेज संघर्ष:

  1. पहला आंग्ल-मराठा युद्ध (1775-1782):

    • कारण: रघुनाथराव को पेशवा बनाने के लिए अंग्रेजों का समर्थन।
    • संधि: सालबाई की संधि (1782)।
    • परिणाम: मराठों का क्षेत्रीय प्रभुत्व बरकरार रहा।
  2. दूसरा आंग्ल-मराठा युद्ध (1803-1805):

    • कारण: मराठा संघ की आपसी कलह और अंग्रेजों का हस्तक्षेप।
    • परिणाम: अंग्रेजों ने मराठों के कई क्षेत्र छीन लिए।
  3. तीसरा आंग्ल-मराठा युद्ध (1817-1818):

    • कारण: मराठा संघ की कमजोर स्थिति।
    • परिणाम: मराठा साम्राज्य का पतन और अंग्रेजों का पूर्ण नियंत्रण।

प्रमुख उपलब्धियां और योगदान:

  1. राजनीतिक:

    • मराठा साम्राज्य ने भारत में मुगल साम्राज्य के पतन के बाद केंद्रीय शक्ति के रूप में उभरकर राजनीतिक स्थिरता प्रदान की।
  2. सैन्य:

    • गुरिल्ला युद्ध शैली और तेज गति से संचालन उनकी प्रमुख ताकत थी।
    • मराठा सेना ने भारतीय सैन्य परंपराओं को नए आयाम दिए।
  3. आर्थिक:

    • चौथ और सरदेशमुखी के माध्यम से वित्तीय संसाधन जुटाए गए।
    • व्यापार और कृषि को प्रोत्साहन दिया।

मराठा (पेशवा) – भाग 3

पेशवा काल के पतन के कारण:

  1. आंतरिक संघर्ष:

    • पेशवाओं के बीच सत्ता की होड़।
    • नारायणराव की हत्या और रघुनाथराव के विवाद ने मराठा प्रशासन को कमजोर किया।
  2. मराठा संघ की कमजोर संरचना:

    • मराठा संघ में गायकवाड़, होल्कर, सिंधिया और भोंसले जैसे शक्तिशाली परिवार स्वतंत्र रूप से कार्य करने लगे।
    • संघ में एकता का अभाव था, जिससे अंग्रेजों को उन्हें हराने में आसानी हुई।
  3. पानीपत की तीसरी लड़ाई (1761):

    • अहमद शाह अब्दाली के खिलाफ हार ने मराठा सैन्य ताकत और मनोबल को बुरी तरह तोड़ दिया।
    • इस हार के बाद मराठा साम्राज्य कमजोर होता गया।
  4. अंग्रेजों का बढ़ता प्रभाव:

    • मराठा शासकों की आंतरिक कलह का अंग्रेजों ने फायदा उठाया।
    • अंग्रेजों ने कूटनीति और सैन्य शक्ति का इस्तेमाल कर मराठों को कमजोर किया।
  5. तीसरा आंग्ल-मराठा युद्ध (1817-1818):

    • अंग्रेजों ने पेशवा बाजीराव द्वितीय को हराकर पुणे पर कब्जा कर लिया।
    • बाजीराव द्वितीय को 1818 में बिठूर (कानपुर) निर्वासित कर दिया गया।
    • इस युद्ध के बाद मराठा साम्राज्य का पतन हुआ, और अंग्रेजों का भारत पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित हो गया।

मराठा साम्राज्य की विशेषताएं:

  1. गुरिल्ला युद्ध नीति:

    • छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा शुरू की गई गुरिल्ला युद्ध नीति को पेशवाओं ने भी अपनाया।
    • दुर्गों का निर्माण और उनका उपयोग रणनीतिक रूप से किया गया।
  2. प्रशासनिक व्यवस्था:

    • मराठा साम्राज्य में स्थानीय प्रशासन को मजबूत किया गया।
    • पेशवाओं ने राजस्व और सैन्य प्रणाली को सुदृढ़ बनाया।
  3. धार्मिक और सांस्कृतिक योगदान:

    • मराठों ने भारतीय संस्कृति और धर्म को बढ़ावा दिया।
    • उन्होंने मंदिरों और धार्मिक स्थलों का संरक्षण किया।
  4. कला और वास्तुकला:

    • मराठा काल में मंदिर निर्माण शैली का विकास हुआ।
    • पुणे और महाराष्ट्र के अन्य क्षेत्रों में मराठा स्थापत्य कला का प्रभाव देखा जा सकता है।

मराठा साम्राज्य का प्रभाव और योगदान:

  1. राजनीतिक:

    • मराठा साम्राज्य ने मुगल साम्राज्य के पतन के बाद एक शक्ति के रूप में उभरकर भारत में राजनीतिक संतुलन बनाया।
    • उन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप में स्थानीय और क्षेत्रीय शक्तियों को संगठित किया।
  2. आर्थिक:

    • मराठों ने व्यापार और कृषि को प्रोत्साहन दिया।
    • चौथ और सरदेशमुखी के माध्यम से संसाधन जुटाए और आर्थिक स्थिरता लाई।
  3. सामाजिक:

    • मराठा साम्राज्य ने समाज में विभिन्न जातियों और समुदायों को संगठित किया।
    • उन्होंने सामाजिक सुधारों का समर्थन किया।
  4. सांस्कृतिक:

    • मराठा साम्राज्य ने भारतीय संस्कृति, धर्म और परंपराओं को संरक्षण दिया।
    • संगीत, साहित्य और कला के क्षेत्र में योगदान किया।

निष्कर्ष:

मराठा (पेशवा) काल भारतीय इतिहास का एक गौरवपूर्ण अध्याय है। पेशवाओं ने मराठा साम्राज्य को उत्तर और दक्षिण भारत में फैलाया। हालांकि आंतरिक कलह, पानीपत की तीसरी लड़ाई, और अंग्रेजों की बढ़ती शक्ति के कारण मराठा साम्राज्य का पतन हुआ। फिर भी, मराठाओं का प्रशासनिक, सैन्य और सांस्कृतिक योगदान भारतीय इतिहास में अद्वितीय है।


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