साइमन कमीशन और नेहरू रिपोर्ट
परिचय: 1927 में ब्रिटिश सरकार ने भारत में संवैधानिक सुधारों के अध्ययन और सिफारिशों के लिए एक आयोग का गठन किया, जिसे साइमन कमीशन कहा गया। भारतीय राजनीतिक दलों ने इसका तीव्र विरोध किया। इसके जवाब में भारतीय नेताओं ने अपना संविधान तैयार करने के लिए नेहरू रिपोर्ट पेश की। इन घटनाओं ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को और अधिक गति दी।
साइमन कमीशन (1927):
-
स्थापना:
- ब्रिटिश प्रधानमंत्री स्टैनली बाल्डविन ने भारत में संवैधानिक सुधारों की समीक्षा के लिए साइमन कमीशन का गठन किया।
- नेतृत्व: सर जॉन साइमन।
-
विशेषताएं:
- इसमें केवल ब्रिटिश सदस्य शामिल थे; कोई भी भारतीय सदस्य नहीं था।
- उद्देश्य: भारत में 1919 के भारत सरकार अधिनियम की समीक्षा और संवैधानिक सुधारों की सिफारिश करना।
-
भारतीयों द्वारा विरोध:
- भारतीय जनता ने इस कमीशन को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया।
- नारा: "साइमन, गो बैक"।
- सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने इसे अस्वीकार किया।
- लाला लाजपत राय ने कमीशन के खिलाफ प्रदर्शन का नेतृत्व किया, जिसमें पुलिस के लाठीचार्ज से उनकी मृत्यु हो गई।
-
कमीशन की रिपोर्ट:
- रिपोर्ट 1930 में प्रकाशित हुई, जिसमें प्रांतीय स्वायत्तता बढ़ाने की सिफारिश की गई।
- भारतीयों की प्रमुख मांगें, जैसे डोमिनियन स्टेटस, अनदेखी कर दी गईं।
नेहरू रिपोर्ट (1928):
-
पृष्ठभूमि:
- साइमन कमीशन के विरोध के दौरान भारतीयों ने अपना संविधान तैयार करने का निर्णय लिया।
- नेतृत्व: पंडित मोतीलाल नेहरू।
- स्थान: 1928 में कांग्रेस का मद्रास अधिवेशन।
-
मुख्य बिंदु:
- भारत के लिए डोमिनियन स्टेटस की मांग।
- सभी के लिए समान अधिकार और स्वतंत्रता की गारंटी।
- धर्म, जाति और लिंग के आधार पर भेदभाव का अंत।
- सभी के लिए न्यायपालिका और विधायिका में समान भागीदारी।
- अल्पसंख्यकों के लिए सांस्कृतिक और धार्मिक स्वतंत्रता।
-
मुस्लिम लीग का विरोध:
- नेहरू रिपोर्ट में मुस्लिम लीग की प्रमुख मांगें, जैसे अलग निर्वाचक मंडल, शामिल नहीं की गईं।
- जिन्ना ने 14 सूत्री मांगें पेश कीं, जो हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रयासों को विफल कर गईं।
साइमन कमीशन के विरोध का विस्तार:
-
सार्वजनिक विरोध:
- भारतीय जनता और नेताओं ने पूरे देश में साइमन कमीशन का जोरदार विरोध किया।
- "साइमन, गो बैक" के नारे और प्रदर्शन ब्रिटिश शासन के प्रति जनता के असंतोष का प्रतीक बन गए।
-
लाला लाजपत राय की मृत्यु (1928):
- साइमन कमीशन के विरोध के दौरान लाहौर में हुए प्रदर्शन का नेतृत्व लाला लाजपत राय ने किया।
- पुलिस लाठीचार्ज में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उनकी मृत्यु हो गई।
- उनकी मृत्यु ने क्रांतिकारी आंदोलनों को और प्रोत्साहित किया। भगत सिंह और उनके साथियों ने जॉन सॉन्डर्स की हत्या करके बदला लिया।
-
ब्रिटिश सरकार की प्रतिक्रिया:
- ब्रिटिश सरकार ने साइमन कमीशन की रिपोर्ट को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास किया।
- इस रिपोर्ट की सिफारिशों का आधार 1935 का भारत सरकार अधिनियम बना।
नेहरू रिपोर्ट का प्रभाव:
-
भारतीय नेताओं के बीच मतभेद:
- नेहरू रिपोर्ट ने कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच मतभेद को और गहरा कर दिया।
- मुस्लिम लीग ने इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों की अनदेखी मानते हुए अस्वीकार कर दिया।
-
कांग्रेस की मांगों का सख्त रुख:
- कांग्रेस ने नेहरू रिपोर्ट के जरिए यह स्पष्ट कर दिया कि वह डोमिनियन स्टेटस से कम पर संतुष्ट नहीं होगी।
- 1929 में जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में कांग्रेस ने लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज की मांग की।
-
जिन्ना की 14 सूत्री मांगें (1929):
- मुस्लिम लीग के नेता मोहम्मद अली जिन्ना ने अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए 14 सूत्री मांगें पेश कीं।
- इन मांगों ने हिंदू-मुस्लिम एकता की संभावनाओं को कम कर दिया।
-
नेहरू रिपोर्ट का ऐतिहासिक महत्व:
- यह भारतीयों द्वारा तैयार किया गया पहला व्यापक संविधान मसौदा था।
- यह स्वराज की दिशा में भारतीय जनता की बढ़ती मांग का प्रतीक था।
साइमन कमीशन और नेहरू रिपोर्ट का संयुक्त प्रभाव:
-
राष्ट्रीय चेतना का विस्तार:
- साइमन कमीशन के विरोध और नेहरू रिपोर्ट ने भारतीय जनता में राष्ट्रीयता और स्वराज की भावना को मजबूत किया।
-
हिंदू-मुस्लिम विभाजन:
- नेहरू रिपोर्ट और मुस्लिम लीग की 14 सूत्री मांगों ने हिंदू-मुस्लिम एकता को कमजोर कर दिया।
- यह विभाजन आगे चलकर भारत के विभाजन का आधार बना।
-
स्वतंत्रता संग्राम की गति:
- इन घटनाओं ने कांग्रेस को पूर्ण स्वराज की मांग करने के लिए प्रेरित किया।
- 1930 में दांडी मार्च और सविनय अवज्ञा आंदोलन की दिशा में ये घटनाएं मील का पत्थर साबित हुईं।
निष्कर्ष:
साइमन कमीशन और नेहरू रिपोर्ट भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण चरण थे। साइमन कमीशन के विरोध ने भारतीय जनता को एकजुट किया और ब्रिटिश शासन के प्रति असंतोष को व्यक्त किया। वहीं, नेहरू रिपोर्ट ने भारतीयों की स्वराज की मांग को स्पष्ट किया। इन घटनाओं ने स्वतंत्रता संग्राम को नई ऊर्जा और दिशा दी। हालांकि, मुस्लिम लीग और कांग्रेस के बीच मतभेद बढ़ने से हिंदू-मुस्लिम एकता को नुकसान हुआ। बावजूद इसके, साइमन कमीशन और नेहरू रिपोर्ट ने भारत की स्वतंत्रता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन घटनाओं ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को एक नई गति और व्यापकता प्रदान की।