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/Modern India (SSC, Railway, Police & All State exam)/Chapter 10
Modern India (SSC, Railway, Police & All State exam)Chapter Unit

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

परिचय: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress - INC) भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का प्रमुख संगठन था। इसकी स्थापना 1885 में हुई और यह 20वीं शताब्दी में ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष का मुख्य केंद्र बन गई। कांग्रेस ने भारतीय जनता को एकजुट कर स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया और बाद में आधुनिक भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना:

  1. स्थापना:

    • वर्ष: 28 दिसंबर 1885।
    • स्थान: गोकुलदास तेजपाल संस्कृत महाविद्यालय, मुंबई।
    • संस्थापक: एलन ऑक्टेवियन ह्यूम (A.O. Hume), एक ब्रिटिश रिटायर्ड सिविल सेवक।
    • उद्देश्य: भारतीय समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर लाना और सरकार के साथ संवाद स्थापित करना।
  2. प्रारंभिक उद्देश्य:

    • भारतीय समाज के शिक्षित वर्ग को संगठित करना।
    • ब्रिटिश सरकार को भारतीयों की समस्याओं और आवश्यकताओं से अवगत कराना।
    • भारतीयों के राजनीतिक अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण प्रयास।
  3. प्रारंभिक नेतृत्व:

    • पहले अध्यक्ष: वूमेश चंद्र बनर्जी।
    • प्रमुख नेता: सुरेंद्रनाथ बनर्जी, दादाभाई नौरोजी, गोपाल कृष्ण गोखले, बाल गंगाधर तिलक।

कांग्रेस के प्रारंभिक चरण (1885-1905):

  1. मध्यमार्गी (Moderates) नेतृत्व:

    • कांग्रेस के प्रारंभिक नेतृत्व में अधिकांश नेता उदारवादी थे, जो शांतिपूर्ण वार्ता और याचिकाओं के माध्यम से सुधार की मांग करते थे।
    • इनके मुख्य उद्देश्य:
      • भारतीयों को प्रशासन में भागीदारी देना।
      • आर्थिक और सामाजिक सुधार।
      • प्रेस की स्वतंत्रता।
  2. प्रमुख उपलब्धियां:

    • कांग्रेस ने भारत में राजनीतिक चेतना और संगठनात्मक प्रयासों को बढ़ावा दिया।
    • दादाभाई नौरोजी ने "धन का अपवहन" (Drain of Wealth) का सिद्धांत प्रस्तुत किया।
  3. ब्रिटिश सरकार का दृष्टिकोण:

    • प्रारंभ में ब्रिटिश सरकार ने कांग्रेस का समर्थन किया, लेकिन जल्द ही इसे संदेह की दृष्टि से देखने लगी।
    • कांग्रेस के बढ़ते प्रभाव से सरकार ने दमनकारी नीतियां अपनाई।

बंगाल विभाजन (1905):

  1. पृष्ठभूमि:

    • लॉर्ड कर्ज़न ने बंगाल को धार्मिक और भाषाई आधार पर विभाजित कर दिया।
    • उद्देश्य: "फूट डालो और राज करो" की नीति अपनाना।
  2. प्रतिक्रिया:

    • बंगाल विभाजन ने भारतीय समाज में व्यापक विरोध को जन्म दिया।
    • स्वदेशी आंदोलन: विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार और स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने का आह्वान।
  3. प्रारंभिक कांग्रेस का दृष्टिकोण:

    • कांग्रेस के उदारवादी नेतृत्व ने बंगाल विभाजन के खिलाफ याचिका और वार्ता का रास्ता चुना।

कांग्रेस का दूसरा चरण (1905-1919):

  1. उग्रवादी (Extremists) नेतृत्व का उदय:

    • प्रमुख नेता: बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, बिपिन चंद्र पाल (लाल-बाल-पाल)।
    • मुख्य उद्देश्य:
      • पूर्ण स्वराज्य की मांग।
      • ब्रिटिश शासन के खिलाफ उग्र और जनआंदोलनों का नेतृत्व।
    • तिलक का नारा: "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा।"
  2. सूरत विभाजन (1907):

    • कारण: कांग्रेस के उदारवादी और उग्रवादी नेताओं के बीच विचारधारा का टकराव।
    • परिणाम: कांग्रेस दो भागों में बंट गई—उदारवादी और उग्रवादी।
    • यह विभाजन ब्रिटिश शासन के लिए लाभदायक साबित हुआ।
  3. प्रमुख आंदोलन:

    • स्वदेशी आंदोलन (1905):
      • विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार और स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा देना।
      • जनजागृति और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बना।
    • होम रूल आंदोलन (1916):
      • नेतृत्व: बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसेंट।
      • उद्देश्य: भारत में स्वशासन (होम रूल) की स्थापना।
      • परिणाम: कांग्रेस में उग्रवादी और उदारवादी नेताओं का पुनः मेल हुआ।
  4. लखनऊ समझौता (1916):

    • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच समझौता।
    • उद्देश्य: ब्रिटिश शासन के खिलाफ एकजुट संघर्ष।
    • परिणाम: हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा मिला।

कांग्रेस का तीसरा चरण (1919-1935):

  1. महात्मा गांधी का नेतृत्व:

    • 1919 के बाद कांग्रेस में महात्मा गांधी का प्रभाव बढ़ा।
    • गांधीजी ने अहिंसा और सत्याग्रह को कांग्रेस की प्रमुख रणनीति बनाया।
  2. प्रमुख आंदोलन:

    • रॉलेट एक्ट के खिलाफ आंदोलन (1919):

      • गांधीजी ने रॉलेट एक्ट को काले कानून की संज्ञा दी।
      • इस कानून के खिलाफ पूरे देश में सत्याग्रह हुआ।
    • जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919):

      • ब्रिटिश अधिकारी जनरल डायर द्वारा अमृतसर में निहत्थे भारतीयों पर गोलीबारी।
      • इस घटना ने पूरे देश को आंदोलित कर दिया और कांग्रेस के जनाधार को मजबूत किया।
    • असहयोग आंदोलन (1920-22):

      • ब्रिटिश शासन के खिलाफ पूर्ण असहयोग का आह्वान।
      • सरकारी नौकरी, स्कूल-कॉलेज और विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार।
      • आंदोलन चौरी-चौरा घटना (1922) के बाद समाप्त कर दिया गया।
  3. नेहरू रिपोर्ट (1928):

    • पंडित मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में तैयार की गई रिपोर्ट।
    • इसमें भारत के लिए डोमिनियन स्टेटस (स्वशासन) की मांग की गई।

महत्वपूर्ण परिवर्तन:

  • कांग्रेस का नेतृत्व अब जनसाधारण तक पहुंच गया।
  • गांधीजी के नेतृत्व में कांग्रेस एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन बन गई।

कांग्रेस का चौथा चरण (1935-1947):

  1. 1935 का भारत शासन अधिनियम:

    • यह अधिनियम ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत में सीमित स्वशासन प्रदान करने का प्रयास था।
    • कांग्रेस ने इस अधिनियम का विरोध किया, लेकिन प्रांतीय चुनावों में भाग लिया।
  2. प्रांतीय चुनाव (1937):

    • कांग्रेस ने 11 में से 7 प्रांतों में सरकार बनाई।
    • इन प्रांतीय सरकारों ने किसानों और मजदूरों के अधिकारों को बढ़ावा दिया।
  3. द्वितीय विश्व युद्ध और कांग्रेस:

    • 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध शुरू होने पर ब्रिटिश सरकार ने भारत को युद्ध में शामिल कर लिया।
    • कांग्रेस ने इस पर आपत्ति जताई और क्रिप्स मिशन (1942) को अस्वीकार कर दिया।
  4. भारत छोड़ो आंदोलन (1942):

    • नेतृत्व: महात्मा गांधी।
    • नारा: "अंग्रेजों भारत छोड़ो"।
    • आंदोलन के दौरान प्रमुख कांग्रेसी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन यह आंदोलन भारत के स्वतंत्रता संग्राम का निर्णायक चरण साबित हुआ।
  5. कैबिनेट मिशन योजना (1946):

    • भारत को स्वतंत्रता देने के लिए ब्रिटिश सरकार ने कैबिनेट मिशन भेजा।
    • कांग्रेस ने भारत के विभाजन का विरोध किया लेकिन अंततः विभाजन के लिए तैयार हो गई।

कांग्रेस का विभाजन और स्वतंत्रता:

  1. भारत विभाजन (1947):

    • कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच मतभेद गहराते गए।
    • भारत को दो स्वतंत्र देशों—भारत और पाकिस्तान—में विभाजित कर दिया गया।
  2. स्वतंत्रता (15 अगस्त 1947):

    • भारत को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता मिली।
    • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस स्वतंत्रता आंदोलन की सबसे प्रमुख शक्ति बनकर उभरी।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का महत्व:

  1. राष्ट्रीय एकता का प्रतीक:

    • कांग्रेस ने विभिन्न धर्म, जाति और क्षेत्र के लोगों को एक मंच पर लाकर स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया।
  2. राजनीतिक जागरूकता:

    • भारतीय जनता में राजनीतिक चेतना और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रसार किया।
  3. स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व:

    • कांग्रेस ने विभिन्न आंदोलनों के माध्यम से ब्रिटिश शासन को चुनौती दी।
    • इसका नेतृत्व महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, और अन्य नेताओं ने किया।

निष्कर्ष:

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भारत के स्वतंत्रता संग्राम की रीढ़ थी। इसकी स्थापना से लेकर स्वतंत्रता प्राप्ति तक, कांग्रेस ने भारतीय समाज को राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक स्तर पर संगठित और जागरूक किया।

महात्मा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने अहिंसा, सत्याग्रह, और जनसंग्रह के माध्यम से ब्रिटिश शासन को समाप्त करने का मार्ग प्रशस्त किया। कांग्रेस ने न केवल स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया, बल्कि स्वतंत्र भारत के राजनीतिक और सामाजिक आधार को भी मजबूत किया।


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