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Indian Polity (SSC, Railway, Police & All State exam)Chapter Unit

नागरिकता

1. नागरिकता का परिचय:

  • भारतीय संविधान का भाग 2 (अनुच्छेद 5 से 11) नागरिकता से संबंधित प्रावधानों का उल्लेख करता है।
  • नागरिकता का अर्थ है कि कोई व्यक्ति एक राष्ट्र का कानूनी सदस्य है और उसे उस देश के अधिकार, कर्तव्य, और संरक्षण प्राप्त हैं।
  • भारत में नागरिकता का निर्धारण संविधान और संसद द्वारा बनाए गए कानूनों के आधार पर होता है।

2. भारतीय नागरिकता की विशेषताएँ:

  • एकल नागरिकता: भारतीय संविधान में प्रत्येक व्यक्ति को केवल "भारतीय नागरिकता" दी गई है।
    • अमेरिका जैसे संघीय देशों में दोहरी नागरिकता होती है (राष्ट्रीय और प्रांतीय), लेकिन भारत में यह नहीं है।
  • समान अधिकार: भारत में हर नागरिक को कानून के समक्ष समानता और मौलिक अधिकार प्राप्त हैं।
  • संविधान आधारित: भारतीय नागरिकता का आधार संविधान है, जिसमें संसद समय-समय पर कानून बनाकर संशोधन कर सकती है।

3. नागरिकता प्राप्त करने के तरीके (1950 में):

संविधान लागू होने के समय नागरिकता के लिए निम्नलिखित प्रावधान किए गए:

  1. अनुच्छेद 5:

    • भारत में जन्मे व्यक्ति।
    • जो भारत में रह रहे थे।
    • जिनके माता-पिता भारत में जन्मे थे।
    • जो भारत में सामान्य रूप से 5 साल तक रहे हों।
  2. अनुच्छेद 6 (पाकिस्तान से आए प्रवासी):

    • भारत में रहने वाले ऐसे लोग जो पाकिस्तान से आए थे और उनके माता-पिता या दादा-दादी भारत में पैदा हुए थे।
    • उन्हें भारत में नागरिकता तभी दी जाती थी यदि वे भारत में पंजीकृत हुए हों।
  3. अनुच्छेद 7 (भारत से पाकिस्तान गए प्रवासी):

    • ऐसे व्यक्ति जो भारत छोड़कर पाकिस्तान गए थे, लेकिन वापस भारत आ गए और उपयुक्त अधिकारियों के समक्ष पंजीकरण करवा लिया।
  4. अनुच्छेद 8 (विदेश में रहने वाले भारतीय):

    • भारतीय मूल के ऐसे व्यक्ति जो विदेश में रहते थे, लेकिन भारत में उनके पूर्वजों का जन्म हुआ था और वे भारत के किसी दूतावास में पंजीकरण करा चुके हों।

4. नागरिकता का निर्धारण संसद द्वारा:

अनुच्छेद 11 संसद को यह अधिकार देता है कि वह नागरिकता प्रदान करने, समाप्त करने, या उससे संबंधित प्रावधानों के लिए कानून बना सके।

  • इस अधिकार के तहत संसद ने नागरिकता अधिनियम, 1955 पारित किया।

5. नागरिकता अधिनियम, 1955 के प्रावधान:

नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत, भारत में नागरिकता प्राप्त करने के निम्नलिखित तरीके निर्धारित किए गए हैं:

  1. जन्म के आधार पर (By Birth):

    • 1 जुलाई 1987 से पहले भारत में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति भारतीय नागरिक है।
    • इसके बाद, माता-पिता में से किसी एक का भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है।
  2. वंश के आधार पर (By Descent):

    • यदि माता-पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक है, तो संतान को नागरिकता दी जाती है।
  3. पंजीकरण द्वारा (By Registration):

    • ऐसे व्यक्ति जो भारतीय मूल के हैं, लेकिन विदेश में रह रहे हैं।
  4. प्राकृतिक रूप से (By Naturalization):

    • जो व्यक्ति 12 वर्षों तक भारत में रहता है और आवश्यक शर्तें पूरी करता है।
  5. क्षेत्रीय अधिग्रहण द्वारा (By Incorporation of Territory):

    • यदि भारत किसी नए क्षेत्र को अधिग्रहित करता है, तो वहां के लोग भारत के नागरिक बन जाते हैं।

6. भारतीय नागरिकता समाप्त होने के तरीके:

भारतीय नागरिकता को समाप्त करने के लिए नागरिकता अधिनियम, 1955 में तीन तरीके निर्धारित किए गए हैं:

  1. त्याग (Renunciation):

    • यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से अपनी भारतीय नागरिकता त्यागना चाहता है, तो वह ऐसा कर सकता है।
    • प्रक्रिया:
      • संबंधित व्यक्ति को भारत सरकार के समक्ष एक आवेदन प्रस्तुत करना होता है।
      • जब व्यक्ति की नागरिकता समाप्त हो जाती है, तो उसके नाबालिग बच्चों की नागरिकता भी समाप्त हो जाती है (लेकिन वे बाद में भारतीय नागरिकता पुनः प्राप्त कर सकते हैं)।
  2. समाप्ति (Termination):

    • यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता प्राप्त करता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता समाप्त हो जाती है।
    • यह प्रक्रिया स्वतः लागू होती है और किसी अतिरिक्त आवेदन की आवश्यकता नहीं होती।
  3. वंचन (Deprivation):

    • सरकार के पास यह अधिकार है कि वह किसी व्यक्ति की नागरिकता को रद्द कर सकती है, यदि:
      • नागरिकता धोखाधड़ी के आधार पर प्राप्त की गई हो।
      • व्यक्ति ने भारत के संविधान के प्रति वफादारी न रखी हो।
      • व्यक्ति 5 साल तक लगातार भारत के बाहर रहा हो।
      • व्यक्ति ने शत्रु देश के साथ संपर्क बनाए रखा हो।

7. नागरिकता अधिनियम में संशोधन:

नागरिकता अधिनियम, 1955 में समय-समय पर संशोधन किए गए हैं। प्रमुख संशोधन इस प्रकार हैं:

  1. 1986 का संशोधन:

    • नागरिकता प्राप्त करने के लिए जन्म के आधार पर शर्तें सख्त कर दी गईं।
    • माता-पिता में से किसी एक का भारतीय नागरिक होना अनिवार्य किया गया।
  2. 2003 का संशोधन:

    • नागरिकता के लिए भारतीय नागरिक माता-पिता की उपस्थिति को अनिवार्य बनाया गया।
    • राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) की अवधारणा प्रस्तुत की गई।
  3. 2019 का संशोधन (CAA - Citizenship Amendment Act):

    • अफगानिस्तान, पाकिस्तान, और बांग्लादेश से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी, और ईसाई धर्म के शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान।
    • यह कानून उन लोगों पर लागू होता है जो 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए थे।
    • मुस्लिम शरणार्थियों को इस अधिनियम के तहत शामिल नहीं किया गया, जिसके कारण यह विवादित बना।

8. नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), 2019 का प्रभाव:

  1. सकारात्मक प्रभाव:

    • शरणार्थियों को कानूनी नागरिकता प्राप्त करने का अवसर।
    • पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों को संरक्षण।
  2. विवाद और आलोचना:

    • इसे धर्म के आधार पर भेदभावपूर्ण माना गया।
    • संविधान के धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत पर सवाल उठे।
    • असम और पूर्वोत्तर राज्यों में विरोध, क्योंकि इसे क्षेत्रीय पहचान के लिए खतरा माना गया।
  3. एनआरसी (NRC) से संबंध:

    • CAA को NRC के साथ जोड़ा गया, जिसने यह आशंका पैदा की कि धार्मिक आधार पर नागरिकता की पहचान हो सकती है।

9. नागरिकता के अधिकार और कर्तव्य:

भारतीय नागरिक होने के नाते निम्नलिखित अधिकार और कर्तव्य प्राप्त होते हैं:

अधिकार:

  1. मौलिक अधिकार (जैसे, स्वतंत्रता का अधिकार, समानता का अधिकार)।
  2. सार्वजनिक सेवाओं में भाग लेने का अधिकार।
  3. केंद्र और राज्य सरकारों में निर्वाचित प्रतिनिधि बनने का अधिकार।

कर्तव्य:

  1. संविधान का पालन और उसके आदर्शों का सम्मान।
  2. देश की रक्षा करना और राष्ट्रीय एकता को बनाए रखना।
  3. सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा करना।

10. प्रवासी भारतीय नागरिकता (Overseas Citizenship of India - OCI):

  • भारत सरकार ने प्रवासी भारतीयों को विशेष दर्जा प्रदान करने के लिए OCI कार्ड का प्रावधान किया है।
  • OCI के लाभ:
    • भारत में असीमित प्रवास और वीजा-मुक्त यात्रा।
    • भारत में संपत्ति खरीदने और व्यवसाय करने की अनुमति।
  • सीमाएं:
    • OCI धारकों को मतदान का अधिकार नहीं है।
    • OCI धारक संवैधानिक पदों पर नहीं रह सकते।

11. भारतीय नागरिकता बनाम विदेशी नागरिकता:

  • भारतीय नागरिकता का उद्देश्य भारत के नागरिकों को राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक अधिकार प्रदान करना है।
  • विदेशी नागरिकता वाले व्यक्ति भारतीय नागरिकों के समान अधिकारों का आनंद नहीं ले सकते।
    तुलनात्मक दृष्टि:
    | पैरामीटर | भारतीय नागरिकता | विदेशी नागरिकता | |-----------------------|---------------------------------------------|---------------------------------------------| | मतदान का अधिकार | उपलब्ध | अनुपलब्ध | | सरकारी नौकरी | पात्र | पात्र नहीं | | संपत्ति का अधिकार | सभी प्रकार की संपत्ति खरीद सकते हैं | कुछ प्रतिबंधित क्षेत्रों में संपत्ति नहीं खरीद सकते | | संवैधानिक पद | योग्य | अनुपलब्ध |

12. नागरिकता का भारतीय संदर्भ में महत्व:

  1. संवैधानिक सुरक्षा: भारतीय नागरिकता लोगों को मौलिक अधिकार प्रदान करती है, जैसे स्वतंत्रता और समानता।
  2. राष्ट्रीय पहचान: नागरिकता राष्ट्रीय एकता और अखंडता को बढ़ावा देती है।
  3. आर्थिक अवसर: भारतीय नागरिकता रोजगार और व्यावसायिक अवसर प्रदान करती है।
  4. लोकतांत्रिक भागीदारी: नागरिकों को चुनाव में भाग लेने और जनप्रतिनिधि बनने का अधिकार मिलता है।

13. नागरिकता के संदर्भ में प्रमुख मुद्दे:

  1. अवैध प्रवास:

    • पड़ोसी देशों से अवैध प्रवास एक बड़ा मुद्दा है, विशेषकर असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में।
    • अवैध प्रवासियों को पहचानने के लिए NRC (National Register of Citizens) की प्रक्रिया शुरू की गई।
  2. शरणार्थियों की समस्या:

    • शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करने के मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक विवाद होते रहे हैं।
    • CAA-2019 को लेकर असम और पूर्वोत्तर राज्यों में व्यापक विरोध।
  3. प्रवासी भारतीय:

    • विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोगों को भारतीय नागरिकता के विशेष अधिकारों की मांग।
    • OCI कार्ड के बावजूद, उन्हें भारत की राजनीतिक प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति नहीं है।

14. नागरिकता से जुड़े संवैधानिक प्रावधान:

  • अनुच्छेद 15 और 16: नागरिकता के आधार पर भेदभाव निषिद्ध है।
  • अनुच्छेद 19: केवल भारतीय नागरिकों को भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, कहीं भी निवास करने, और व्यवसाय चलाने का अधिकार है।
  • अनुच्छेद 21: जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार।

15. नागरिकता से संबंधित समसामयिक चुनौतियां:

  1. धार्मिक आधार पर भेदभाव:

    • CAA को धर्म आधारित कानून के रूप में देखा गया, जिससे देश में धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत पर बहस हुई।
  2. असम NRC:

    • लाखों लोगों को राज्य में NRC प्रक्रिया के तहत अवैध प्रवासी घोषित किया गया, जिससे उनकी नागरिकता को लेकर विवाद पैदा हुआ।
  3. जलवायु शरणार्थी:

    • बढ़ते पर्यावरणीय संकट के कारण पड़ोसी देशों से जलवायु शरणार्थियों की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

16. नागरिकता का भविष्य:

  1. डिजिटल नागरिकता:
    • भारत डिजिटल युग में नागरिकता के सत्यापन और पहचान को डिजिटल रूप से संगठित करने की ओर बढ़ रहा है।
  2. शरणार्थी नीतियां:
    • स्पष्ट और संतुलित शरणार्थी नीति की आवश्यकता है।
  3. प्रवासी भारतीयों का योगदान:
    • OCI कार्ड धारकों को अधिक अधिकार देकर भारत की अर्थव्यवस्था और संस्कृति को बढ़ावा दिया जा सकता है।

सारांश:

नागरिकता भारतीय लोकतंत्र की नींव है। यह न केवल व्यक्तियों को अधिकार और कर्तव्य प्रदान करती है, बल्कि राष्ट्र के प्रति उनकी पहचान और वफादारी को भी सुनिश्चित करती है।
नागरिकता से जुड़े समसामयिक मुद्दे और चुनौतियां भारत की संघीय संरचना और धर्मनिरपेक्षता के प्रति संवेदनशीलता की आवश्यकता को दर्शाती हैं।

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