Indian Philosophy- I
Philosophy Paper 1, Lucknow University (Hindi Notes)
इस पाठ्यक्रम में छात्र भारतीय दर्शन के विभिन्न स्कूलों और उनके सिद्धांतों की गहरी समझ प्राप्त करेंगे। Unit-I में दर्शन के स्वभाव और क्षेत्र पर चर्चा की जाएगी, साथ ही भारतीय दर्शन की अवधारणात्मक पृष्ठभूमि और विभिन्न भारतीय परंपराओं की समझ दी जाएगी। इसमें प्रस्थानत्रयी और पुरुषार्थ-चतुष्टय की परिभाषा, भारतीय दर्शन की सामान्य विशेषताएँ, और भारतीय दर्शन के दो प्रमुख वर्ग आस्तिक और नास्तिक का अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद चार्वाक दर्शन की जाँच की जाएगी, जिसमें ज्ञान के स्रोतों जैसे अनुमान, श्रुति और तुलना का इनकार, साथ ही कर्म और मोक्ष के सिद्धांतों का विश्लेषण किया जाएगा। Unit-II में जैन धर्म का अध्ययन किया जाएगा, जिसमें ज्ञान के प्रमाण, प्रत्यक्षा और परोक्ष ज्ञान, अनेकांतवाद, नयवाद, सप्तभंगिनय और द्रव्य, गुण और पर्याय के सिद्धांतों का विश्लेषण होगा। जैन धर्म के बंधन और मुक्ति के सिद्धांतों पर भी चर्चा की जाएगी। Unit-III में बुद्ध धर्म की चार महान सत्य (चत्वारि आर्यसत्यानि), प्रत्ययसमुत्पाद सिद्धांत, भवचक्र, आष्टांगिक मार्ग, क्षणभंगवाद और अनात्मवाद पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा, कर्म, पुनर्जन्म और निर्वाण की अवधारणाओं पर भी चर्चा की जाएगी। Unit-IV में सांख्य दर्शन के सत्कार्यवाद सिद्धांत, प्रकृति और पुरुष की प्रकृति, उनके तत्व और बंधन-मुक्ति के सिद्धांतों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इसके बाद योग के सिद्धांतों का अध्ययन किया जाएगा, जिसमें चित्त, चित्तभूमि, चित्तवृत्ति, और आष्टांग योग (यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि) के चरणों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।