Environmental Science (SSC, Railway, Police & All State exam)Chapter Unit
पर्यावरण से संबंधित संगठन तथा सम्मेलन (Environmental Organizations and Conventions)
परिचय:
पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न संगठन और सम्मेलन कार्यरत हैं। इनका उद्देश्य पर्यावरणीय मुद्दों, जैसे जैव विविधता ह्रास, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक उपयोग से निपटना है।
पर्यावरण से संबंधित प्रमुख संगठन:
1. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP):
- स्थापना वर्ष: 1972
- मुख्यालय: नैरोबी, केन्या
- उद्देश्य:
- पर्यावरणीय मुद्दों पर वैश्विक नेतृत्व प्रदान करना।
- जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, और सतत विकास के लिए पहल।
- प्रमुख पहल:
- ओजोन परत संरक्षण (मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल)।
- ग्रीन इकोनॉमी।
2. विश्व वन्यजीव कोष (WWF - World Wide Fund for Nature):
- स्थापना वर्ष: 1961
- मुख्यालय: ग्लैंड, स्विट्ज़रलैंड
- उद्देश्य:
- जैव विविधता और वन्यजीवों का संरक्षण।
- वन, तटीय क्षेत्र, और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा।
3. ग्रीनपीस (Greenpeace):
- स्थापना वर्ष: 1971
- मुख्यालय: एम्स्टर्डम, नीदरलैंड्स
- उद्देश्य:
- पर्यावरणीय मुद्दों पर जागरूकता और कार्रवाई।
- परमाणु ऊर्जा, वनों की कटाई, और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ अभियान।
4. इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर (IUCN):
- स्थापना वर्ष: 1948
- मुख्यालय: ग्लैंड, स्विट्ज़रलैंड
- उद्देश्य:
- जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा।
- "रेड लिस्ट" प्रकाशित करना, जो लुप्तप्राय प्रजातियों की सूची है।
5. विश्व बैंक (World Bank):
- पर्यावरणीय और सतत विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
6. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT - National Green Tribunal):
- स्थापना: 2010, भारत
- उद्देश्य: पर्यावरण संरक्षण के लिए त्वरित न्याय।
- प्रमुख कार्य:
- प्रदूषण नियंत्रण।
- प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण।
पर्यावरण से संबंधित प्रमुख सम्मेलन:
1. पृथ्वी सम्मेलन (Earth Summit):
- आयोजन वर्ष: 1992
- स्थान: रियो डी जनेरियो, ब्राज़ील
- उद्देश्य:
- सतत विकास पर वैश्विक सहमति।
- प्रमुख दस्तावेज:
- जैव विविधता पर कन्वेंशन (CBD)।
- जलवायु परिवर्तन पर फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC)।
2. क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol):
- स्थापना वर्ष: 1997
- उद्देश्य:
- ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना।
- विकसित देशों को कार्बन क्रेडिट तंत्र में भाग लेने के लिए प्रेरित करना।
3. पेरिस समझौता (Paris Agreement):
- स्थापना वर्ष: 2015
- उद्देश्य:
- वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5-2 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना।
- ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को नियंत्रित करना।
4. मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (Montreal Protocol):
- स्थापना वर्ष: 1987
- उद्देश्य:
- ओजोन परत को नष्ट करने वाले पदार्थों, जैसे CFCs, का उन्मूलन।
- यह पर्यावरण संरक्षण में सबसे सफल समझौतों में से एक है।
5. रैमसर संधि (Ramsar Convention):
- स्थापना वर्ष: 1971
- उद्देश्य:
- आर्द्रभूमि (Wetlands) और उनकी जैव विविधता का संरक्षण।
- भारत के प्रमुख रामसर स्थल:
- चिल्का झील, ओडिशा।
- वुलर झील, जम्मू और कश्मीर।
6. बायोलॉजिकल डायवर्सिटी कन्वेंशन (CBD):
- स्थापना वर्ष: 1992 (पृथ्वी सम्मेलन का हिस्सा)
- उद्देश्य:
- जैव विविधता संरक्षण।
- जैव संसाधनों का सतत उपयोग।
7. स्टॉकहोम सम्मेलन (Stockholm Conference):
- आयोजन वर्ष: 1972
- स्थान: स्टॉकहोम, स्वीडन
- उद्देश्य:
- पर्यावरण संरक्षण को वैश्विक एजेंडा बनाना।
- सतत विकास और पर्यावरणीय समस्याओं पर चर्चा।
- महत्वपूर्ण परिणाम:
- संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की स्थापना।
- "Only One Earth" थीम के साथ जागरूकता।
8. यूएनएफसीसीसी (UNFCCC - United Nations Framework Convention on Climate Change):
- स्थापना वर्ष: 1992 (पृथ्वी सम्मेलन का हिस्सा)
- उद्देश्य:
- ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को नियंत्रित करना।
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटना।
9. दारा सम्मेलन (Doha Amendment):
- आयोजन वर्ष: 2012
- उद्देश्य:
- क्योटो प्रोटोकॉल की अवधि को बढ़ाना।
- विकसित देशों के लिए अधिक कड़े ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन लक्ष्य।
10. आईपीसीसी (IPCC - Intergovernmental Panel on Climate Change):
- स्थापना वर्ष: 1988
- उद्देश्य:
- जलवायु परिवर्तन पर वैज्ञानिक अनुसंधान और रिपोर्ट प्रकाशित करना।
- नीति निर्माताओं को सटीक जानकारी प्रदान करना।
भारत में पर्यावरणीय संरक्षण के प्रयास:
1. राष्ट्रीय जैव विविधता अधिनियम, 2002:
- जैव विविधता के संरक्षण और सतत उपयोग के लिए।
- स्थानीय समुदायों को संरक्षण में शामिल करना।
2. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972:
- राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य की स्थापना।
- वन्यजीवों के शिकार पर प्रतिबंध।
3. राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC):
- 2008 में शुरू की गई।
- आठ मिशनों के माध्यम से जलवायु परिवर्तन से निपटना।
- सौर ऊर्जा मिशन।
- ऊर्जा दक्षता मिशन।
- हरित भारत मिशन।
4. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT):
- पर्यावरणीय न्याय प्रदान करने और प्रदूषण रोकने के लिए।
अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठन:
1. फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन (FAO):
- स्थापना वर्ष: 1945
- उद्देश्य:
- कृषि, वनों, और मत्स्य संसाधनों का सतत उपयोग।
- पर्यावरणीय सुरक्षा के साथ खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना।
2. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO):
- स्थापना वर्ष: 1948
- पर्यावरणीय भूमिका:
- प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के स्वास्थ्य पर प्रभाव का अध्ययन।
- स्वच्छ जल और स्वच्छता पर जोर।
3. यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम (UNDP):
- सतत विकास परियोजनाओं को प्रोत्साहित करना।
- पर्यावरणीय प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन पर काम।
4. क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क (CAN):
- 120 से अधिक देशों में जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय न्याय के लिए काम करने वाला नेटवर्क।
5. रैमसर सचिवालय (Ramsar Secretariat):
- आर्द्रभूमि और उनके पारिस्थितिक तंत्र के संरक्षण के लिए।
भारत में पर्यावरणीय संरक्षण से जुड़े प्रमुख कार्यक्रम:
1. गंगा कार्य योजना (Ganga Action Plan):
- लॉन्च वर्ष: 1985
- उद्देश्य:
- गंगा नदी की स्वच्छता।
- औद्योगिक और घरेलू कचरे को नियंत्रित करना।
2. नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (NMCG):
- लॉन्च वर्ष: 2014
- उद्देश्य:
- गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाना।
- नदी के किनारे वनीकरण को बढ़ावा देना।
3. जल शक्ति अभियान:
- लॉन्च वर्ष: 2019
- उद्देश्य:
- जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन।
- ग्राउंडवॉटर पुनर्भरण।
4. सौर ऊर्जा मिशन (Solar Mission):
- अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना।
5. पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम:
- स्कूल और कॉलेज स्तर पर पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा देना।
- बच्चों और युवाओं में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता।
पर्यावरणीय संरक्षण के लिए व्यक्तिगत भूमिका:
1. ऊर्जा संरक्षण:
- ऊर्जा कुशल उपकरणों का उपयोग।
- सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा जैसे अक्षय ऊर्जा स्रोतों को अपनाना।
2. कचरा प्रबंधन:
- कचरे को कम करना, पुन: उपयोग, और पुनर्चक्रण।
- प्लास्टिक का उपयोग कम करना।
3. जल संरक्षण:
- पानी बचाने की आदतें अपनाना।
- वर्षा जल संचयन को प्रोत्साहित करना।
4. पर्यावरणीय जागरूकता:
- सामाजिक माध्यमों और सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूकता फैलाना।
- वृक्षारोपण अभियानों में भाग लेना।
निष्कर्ष:
पर्यावरणीय संगठन और सम्मेलन वैश्विक और स्थानीय स्तर पर पर्यावरणीय मुद्दों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत और दुनिया को पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए इन संगठनों और सम्मेलनों की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना चाहिए। इसके अलावा, प्रत्येक व्यक्ति का योगदान इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए आवश्यक है।