Bhartiya Jyotish ka ItihasSemester 1, BA, Jyotirvigyan , LU
Complete Syllabus & Study Notes

Bhartiya Jyotish ka Itihas

Jyotirvighyan Paper 2, Lucknow University (Hindi Notes)

इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को प्राचीन काल से लेकर आधुनिक काल तक ज्योतिषशास्त्र के विकास और उसके विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कराना है। इस पाठ्यक्रम के माध्यम से छात्र ज्योतिष के ऐतिहासिक पक्ष, व्यावहारिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोणों को समझेंगे। साथ ही, विद्यार्थियों को ज्योतिष के विभिन्न स्कूलों और आचार्यों के सिद्धांतों से परिचित कराना है, ताकि वे भविष्य में ज्योतिष के क्षेत्र में अनुसंधान और अध्यायन करने के लिए प्रेरित हो सकें। Unit-I में वेदिक काल में ज्योतिष का उद्भव और विकास, ऋग्वेद ज्योतिष, याजुर्वेद और अर्थववेद ज्योतिष पर चर्चा की जाएगी। Unit-II में रामायण और महाभारत काल में ज्योतिष का योगदान और विकास, इसके सामाजिक और धार्मिक संदर्भ पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। Unit-III में ज्योतिष के प्रमुख आचार्य जैसे लग्न, वराहमिहिर, आर्यभट (प्रथम और द्वितीय), ब्रह्मगुप्त, ललित और मुझनाल के योगदानों का अध्ययन किया जाएगा। Unit-IV में ज्योतिष के आचार्य-भास्कराचार्य (प्रथम और द्वितीय), कमलाकर भट्ट, गणेश दैवदन, वेदांगेष, बापूणी खेत तथा सुधाकर द्विवेदी के योगदानों और उनके कार्यों का विस्तार से अध्ययन होगा। इस पाठ्यक्रम के माध्यम से छात्रों को ज्योतिषशास्त्र की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, विकास और विभिन्न आचार्यों के दृष्टिकोणों का ज्ञान मिलेगा, जो उनके भविष्य के अध्ययन और शोध के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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