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Ancient India (SSC, Railway, Police & All State exam)Chapter Unit

छठी शताब्दी ईसा पूर्व के धार्मिक आंदोलन

परिचय:

छठी शताब्दी ईसा पूर्व भारतीय इतिहास में धार्मिक और सामाजिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण काल था। इस समय समाज में कई धार्मिक और दार्शनिक आंदोलनों का उदय हुआ। इन आंदोलनों ने ब्राह्मणवाद की जटिलता, यज्ञ-कर्मकांड और वर्ण व्यवस्था की कठोरता को चुनौती दी। इनका उद्देश्य साधारण जीवन जीने की प्रेरणा देना और मोक्ष के सरल मार्ग प्रदान करना था।


1. छठी शताब्दी ईसा पूर्व की पृष्ठभूमि:

  • सामाजिक स्थिति:

    • वर्ण व्यवस्था कठोर हो गई थी।
    • शूद्रों और महिलाओं को धार्मिक अनुष्ठानों से बाहर रखा गया था।
    • ब्राह्मणों का वर्चस्व और यज्ञों में धन का अत्यधिक व्यय।
  • धार्मिक स्थिति:

    • जटिल यज्ञ-कर्मकांड और ब्राह्मणों का एकाधिकार।
    • आम जनता के लिए धर्म का पालन कठिन हो गया था।
  • आर्थिक स्थिति:

    • कृषि और व्यापार का विकास।
    • धन की असमानता से सामाजिक असंतोष।
  • राजनीतिक स्थिति:

    • महाजनपदों का उदय और राजाओं का समर्थन।
    • नई धार्मिक विचारधाराओं को राजाओं का संरक्षण।

2. प्रमुख धार्मिक आंदोलन:

छठी शताब्दी ईसा पूर्व में कई धार्मिक और दार्शनिक विचारधाराओं का उदय हुआ। इनमें बौद्ध और जैन धर्म सबसे प्रमुख हैं।

बौद्ध धर्म

  • संस्थापक: गौतम बुद्ध (563-483 ईसा पूर्व)।

  • जीवन परिचय:

    • जन्म: कपिलवस्तु (लुंबिनी), शाक्य वंश।
    • माता: महामाया, पिता: शुद्धोधन।
    • बुद्धत्व की प्राप्ति: गया (बोधगया) में बोधि वृक्ष के नीचे।
    • प्रथम उपदेश: सारनाथ (धर्मचक्र प्रवर्तन)।
    • निर्वाण: कुशीनगर।
  • मुख्य शिक्षाएँ:

    • चार आर्य सत्य (Four Noble Truths):
      1. दुःख (संसार में दुःख है)।
      2. दुःख का कारण (तृष्णा या इच्छाएँ)।
      3. दुःख का निवारण (तृष्णा का त्याग)।
      4. अष्टांगिक मार्ग (दुःख निवारण का मार्ग)।
    • अष्टांगिक मार्ग: सही दृष्टि, सही संकल्प, सही वचन, सही कर्म, सही आजीविका, सही प्रयास, सही स्मृति, सही ध्यान।
    • मध्य मार्ग: अतिसंयम और अतिभोग से बचना।
  • धार्मिक ग्रंथ:

    • त्रिपिटक: विनय पिटक, सुत्त पिटक, अभिधम्म पिटक।

जैन धर्म

  • संस्थापक: वर्द्धमान महावीर (599-527 ईसा पूर्व)।

  • जीवन परिचय:

    • जन्म: वैशाली के कुंडग्राम, ज्ञातृक वंश।
    • माता: त्रिशला, पिता: सिद्धार्थ।
    • 30 वर्ष की आयु में घर त्याग।
    • केवलज्ञान की प्राप्ति: ऋजुपालिका नदी के किनारे।
    • निर्वाण: पावापुरी।
  • मुख्य शिक्षाएँ:

    • त्रिरत्न (Three Jewels):
      1. सम्यक ज्ञान (सही ज्ञान)।
      2. सम्यक दर्शन (सही दृष्टि)।
      3. सम्यक आचरण (सही आचरण)।
    • पांच महाव्रत (Five Great Vows):
      1. अहिंसा (हिंसा न करना)।
      2. सत्य (सत्य बोलना)।
      3. अस्तेय (चोरी न करना)।
      4. ब्रह्मचर्य (इंद्रिय संयम)।
      5. अपरिग्रह (संपत्ति का त्याग)।
  • धार्मिक ग्रंथ:

    • जैन आगम, जो श्वेतांबर और दिगंबर परंपराओं में विभाजित हैं।

3. बौद्ध धर्म और जैन धर्म का प्रसार:

बौद्ध धर्म का प्रसार:

  • बुद्ध के समय:

    • गौतम बुद्ध ने गंगा और यमुना के मैदानों में धर्म का प्रचार किया।
    • उनके शिष्यों (भिक्षु और भिक्षुणियाँ) ने धर्म का प्रचार किया।
  • मौर्य साम्राज्य के समय:

    • सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म को राजधर्म के रूप में अपनाया।
    • अशोक के धर्म प्रचारकों ने श्रीलंका, मध्य एशिया, और दक्षिण-पूर्व एशिया में धर्म का प्रचार किया।
  • विदेशों में प्रसार:

    • श्रीलंका: महेन्द्र और संघमित्रा के माध्यम से।
    • चीन, जापान, तिब्बत और मंगोलिया में धर्म का विस्तार।
  • मठ और विश्वविद्यालय:

    • बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए मठों और विश्वविद्यालयों की स्थापना।
    • उदाहरण: नालंदा, विक्रमशिला।

जैन धर्म का प्रसार:

  • महावीर के समय:

    • महावीर ने उत्तरी और पूर्वी भारत के अनेक क्षेत्रों में धर्म का प्रचार किया।
    • उनके प्रमुख अनुयायी क्षत्रिय और व्यापारी वर्ग से थे।
  • मौर्य और गुप्त काल:

    • चंद्रगुप्त मौर्य ने जैन धर्म अपनाया।
    • दक्कन और दक्षिण भारत में व्यापारियों के माध्यम से धर्म का प्रसार।
  • विदेशों में प्रसार:

    • जैन धर्म का प्रभाव मुख्य रूप से भारत तक सीमित रहा।
    • व्यापारियों ने इसे दक्षिण और पश्चिम भारत में लोकप्रिय बनाया।
  • मठ और स्थापत्य:

    • जैन मंदिर और गुफाएँ।
    • उदाहरण: एलोरा और उदयगिरि की गुफाएँ।

4. अन्य धार्मिक और दार्शनिक संप्रदाय:

छठी शताब्दी ईसा पूर्व में बौद्ध और जैन धर्म के साथ-साथ कई अन्य धार्मिक और दार्शनिक संप्रदाय भी उभरे।

आजीवक संप्रदाय:

  • संस्थापक: मक्कलि गोसाल।
  • मुख्य शिक्षाएँ:
    • नियतिवाद (Determinism): सभी घटनाएँ पूर्व निर्धारित हैं।
    • स्वतंत्र इच्छा का कोई महत्व नहीं।
  • लोकप्रियता: आजीवक संप्रदाय ने कुछ समय तक लोकप्रियता पाई लेकिन बाद में इसका पतन हो गया।

लोकायत या चार्वाक दर्शन:

  • मुख्य विचारधारा:
    • भौतिकवादी दर्शन।
    • कर्मकांड और पुनर्जन्म को नकारा।
    • "इहलोक ही सत्य है, परलोक का अस्तित्व नहीं।"
  • प्रभाव: ब्राह्मणवाद और अन्य धर्मों को चुनौती दी।

5. छठी शताब्दी के धार्मिक आंदोलनों का प्रभाव:

  • सामाजिक प्रभाव:

    • वर्ण व्यवस्था और कर्मकांड की आलोचना।
    • महिलाओं और शूद्रों को धार्मिक अधिकार।
    • समानता और अहिंसा के सिद्धांतों का प्रचार।
  • धार्मिक प्रभाव:

    • ब्राह्मणवादी धर्म में सुधार और सरलता।
    • यज्ञों का स्थान दार्शनिक विचारों ने लिया।
    • वैदिक धर्म का उत्तरवैदिक धर्म में रूपांतरण।
  • राजनीतिक प्रभाव:

    • राजाओं ने इन नए आंदोलनों को संरक्षण दिया।
    • मौर्य साम्राज्य ने बौद्ध धर्म के माध्यम से एकता को बढ़ावा दिया।
  • सांस्कृतिक प्रभाव:

    • कला, स्थापत्य और साहित्य का विकास।
    • स्तूप, विहार, और गुफा स्थापत्य।
    • तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालयों का विकास।

6. प्रमुख स्थलों का महत्व:

  • बौद्ध धर्म के स्थल: बोधगया, सारनाथ, कुशीनगर।
  • जैन धर्म के स्थल: पावापुरी, श्रवणबेलगोला, उदयगिरि।
  • आजीवक संप्रदाय: सावत्थी।

7. कला और स्थापत्य में प्रभाव:

छठी शताब्दी ईसा पूर्व के धार्मिक आंदोलनों ने कला और स्थापत्य को भी अत्यधिक प्रभावित किया। इन धर्मों ने अपने विचारों और शिक्षाओं को मूर्तिकला, चित्रकला, और स्थापत्य में व्यक्त किया।

बौद्ध धर्म का प्रभाव:

  • स्तूप निर्माण:

    • बौद्ध धर्म के प्रतीक।
    • प्रमुख स्तूप:
      • सांची का स्तूप: अशोक द्वारा निर्मित।
      • कुशीनगर स्तूप: बुद्ध के महापरिनिर्वाण स्थल।
      • धमेख स्तूप: सारनाथ में स्थित।
  • विहार और चैत्य:

    • विहार: भिक्षुओं के रहने के लिए मठ।
      • जैसे: नालंदा और विक्रमशिला।
    • चैत्य: उपासना स्थल।
      • जैसे: कार्ले और अजंता की गुफाएँ।
  • मूर्तिकला:

    • बुद्ध की विभिन्न मुद्राओं में मूर्तियाँ।
      • ध्यान मुद्रा, भूमिस्पर्श मुद्रा, धर्मचक्र प्रवर्तन मुद्रा।

जैन धर्म का प्रभाव:

  • जैन मंदिर:

    • जैन मंदिरों का निर्माण सरलता और भव्यता का प्रतीक।
    • प्रमुख मंदिर:
      • दिलवाड़ा मंदिर (माउंट आबू): संगमरमर से निर्मित।
      • गिरनार और पावापुरी के मंदिर।
  • गुफा स्थापत्य:

    • उदयगिरि और एलोरा की गुफाएँ।
  • मूर्तिकला:

    • जैन तीर्थंकरों की विशालकाय मूर्तियाँ।
      • जैसे: श्रवणबेलगोला का बाहुबली।

8. छठी शताब्दी ईसा पूर्व के धार्मिक आंदोलनों की सीमाएँ:

  • सामाजिक असमानता:

    • बौद्ध और जैन धर्म ने शूद्रों और महिलाओं को धर्म में प्रवेश दिया, लेकिन उनकी स्थिति पूरी तरह नहीं सुधरी।
    • वर्ण व्यवस्था और जातिगत भेदभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हो सका।
  • धर्म का विभाजन:

    • समय के साथ इन धर्मों में भी विभाजन हुआ।
      • बौद्ध धर्म: हीनयान और महायान।
      • जैन धर्म: श्वेतांबर और दिगंबर।
  • व्यावहारिक कठिनाइयाँ:

    • अहिंसा और अपरिग्रह के सिद्धांत हर व्यक्ति के लिए व्यावहारिक नहीं थे।
    • गृहस्थ जीवन और साधु जीवन के बीच अंतर बना रहा।

9. छठी शताब्दी के धार्मिक आंदोलनों का ऐतिहासिक महत्व:

  • सामाजिक परिवर्तन:

    • धर्म में समानता और सरलता की शुरुआत।
    • महिलाओं और शूद्रों के लिए धर्म में भागीदारी का अवसर।
  • धार्मिक सुधार:

    • वैदिक धर्म की जटिलता को चुनौती दी गई।
    • यज्ञ-कर्मकांड के स्थान पर ध्यान और आत्मा पर बल।
  • वैश्विक प्रभाव:

    • बौद्ध धर्म ने एशिया के विभिन्न हिस्सों (चीन, जापान, कोरिया) में प्रभाव डाला।
    • जैन धर्म ने व्यापारिक समुदायों में नैतिकता और अपरिग्रह का प्रसार किया।
  • कला और साहित्य का विकास:

    • बौद्ध और जैन साहित्य ने भारतीय भाषाओं को समृद्ध किया।
    • स्थापत्य, मूर्तिकला, और चित्रकला का अभूतपूर्व विकास।

10. छठी शताब्दी के धार्मिक आंदोलनों का सारांश:

छठी शताब्दी ईसा पूर्व के धार्मिक आंदोलन भारतीय इतिहास के एक महत्वपूर्ण मोड़ का प्रतीक हैं। इन आंदोलनों ने न केवल समाज और धर्म में सुधार किया, बल्कि कला, संस्कृति, और शिक्षा के क्षेत्र में भी स्थायी योगदान दिया।

  • बौद्ध और जैन धर्म ने धार्मिक सहिष्णुता, समानता, और अहिंसा के सिद्धांतों को बढ़ावा दिया।
  • इन आंदोलनों ने भारतीय समाज को संगठित किया और आधुनिक भारतीय संस्कृति की नींव रखी।

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