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Agriculture and Animal Husbandry (SSC, Railway, Police & All State exam)Chapter Unit

कृषि के प्रकार

भारत में कृषि को भौगोलिक परिस्थितियों, जलवायु, और आर्थिक गतिविधियों के आधार पर विभिन्न प्रकारों में विभाजित किया गया है।


1. परंपरागत कृषि (Traditional Farming):

  • यह कृषि पद्धति पुराने तौर-तरीकों पर आधारित है।
  • इसमें बैल, हल, और स्थानीय बीजों का उपयोग होता है।
  • जैविक खाद जैसे गोबर और कम्पोस्ट का प्रयोग किया जाता है।
  • उत्पादकता कम होती है और यह मुख्यतः छोटे किसानों द्वारा की जाती है।

2. सघन कृषि (Intensive Farming):

  • इसमें एक ही क्षेत्र से अधिकतम उत्पादन लिया जाता है।
  • उच्च गुणवत्ता वाले बीज, रासायनिक उर्वरक, और सिंचाई तकनीकों का उपयोग।
  • मुख्यतः धान और गेहूं जैसी फसलों में प्रचलित।

3. स्थानांतरित कृषि (Shifting Cultivation):

  • इसे झूम खेती भी कहते हैं।
  • जंगल की जमीन को साफ कर फसलें उगाई जाती हैं, और कुछ वर्षों बाद भूमि को छोड़ दिया जाता है।
  • प्रचलित क्षेत्र: पूर्वोत्तर भारत।
  • समस्या: पर्यावरणीय हानि और मिट्टी की उर्वरता में कमी।

4. सिंचित कृषि (Irrigated Farming):

  • इसमें जल स्रोतों जैसे नहर, ट्यूबवेल, और डैम का उपयोग कर सिंचाई की जाती है।
  • भारत के हरित क्रांति क्षेत्रों में प्रचलित।
  • फसलें: गेहूं, धान, गन्ना।

5. रेनफेड कृषि (Rainfed Farming):

  • वर्षा पर आधारित कृषि।
  • सिंचाई के साधनों की अनुपलब्धता के कारण फसल उत्पादन बारिश पर निर्भर करता है।
  • क्षेत्र: राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र।
  • फसलें: बाजरा, ज्वार, मूंगफली।

6. व्यावसायिक कृषि (Commercial Farming):

  • इसमें नकदी फसलों का उत्पादन किया जाता है, जो बाजार में बेची जाती हैं।
  • फसलें: गन्ना, कपास, चाय, कॉफी।
  • उद्देश्य: अधिक से अधिक लाभ प्राप्त करना।
  • प्रचलित क्षेत्र: महाराष्ट्र, गुजरात, असम।

7. जैविक कृषि (Organic Farming):

  • बिना रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों के प्राकृतिक तरीकों से खेती।
  • जैविक खाद, हरी खाद, और प्राकृतिक कीटनाशकों का उपयोग।
  • लाभ: मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण का संरक्षण।

8. मिश्रित कृषि (Mixed Farming):

  • इसमें फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, मछली पालन, या मुर्गी पालन भी किया जाता है।
  • लाभ: आय के विविध स्रोत।
  • क्षेत्र: पंजाब, हरियाणा।

9. बागवानी कृषि (Horticulture Farming):

  • इसमें फलों, सब्जियों, फूलों, और मसालों की खेती होती है।
  • भारत में बागवानी का बड़ा योगदान है, खासकर निर्यात में।
  • क्षेत्र: महाराष्ट्र (संतरा), हिमाचल प्रदेश (सेब)।

10. पारंपरिक जलवायु-आधारित कृषि (Subsistence Farming):

  • यह मुख्यतः आत्मनिर्भरता के लिए की जाती है।
  • छोटे किसान अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए फसल उगाते हैं।
  • उत्पादकता सीमित होती है और बाजार पर कम निर्भरता होती है।

11. फसल चक्र आधारित कृषि (Crop Rotation Farming):

  • इसमें एक ही भूमि पर विभिन्न फसलों को बदल-बदल कर उगाया जाता है।
  • उद्देश्य: मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना और उत्पादन बढ़ाना।
  • उदाहरण:
    • एक सीजन में दलहन (चना) और दूसरे सीजन में अनाज (गेहूं)।
  • लाभ:
    • मिट्टी में पोषक तत्वों की भरपाई।
    • कीट और रोगों का नियंत्रण।

12. संविदा कृषि (Contract Farming):

  • किसान और कंपनियों के बीच समझौते के तहत खेती की जाती है।
  • कंपनियां किसानों को बीज, उर्वरक, और तकनीकी सहायता प्रदान करती हैं।
  • फसल कटाई के बाद कंपनियां फसल को तय कीमत पर खरीदती हैं।
  • क्षेत्र: नकदी फसलें जैसे आलू, टमाटर (पेप्सिको जैसी कंपनियों के साथ)।

13. प्राकृतिक कृषि (Natural Farming):

  • रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बिना प्राकृतिक रूप से खेती।
  • सुभाष पालेकर की "जीरो बजट प्राकृतिक खेती" का प्रमुख उदाहरण।
  • तकनीक:
    • जीवामृत, घनजीवामृत का उपयोग।
    • मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता पर निर्भरता।
  • लाभ:
    • उत्पादन लागत में कमी।
    • पर्यावरण का संरक्षण।

14. सामूहिक कृषि (Collective Farming):

  • इसमें कई किसान मिलकर सामूहिक रूप से खेती करते हैं।
  • संसाधन और मुनाफा साझा किया जाता है।
  • प्रचलित क्षेत्र: कर्नाटक में सहकारी समितियों के रूप में।

15. जलवायु अनुकूल कृषि (Climate Smart Farming):

  • यह जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अपनाई जाती है।
  • फसलें: सूखा-सहिष्णु फसलें जैसे बाजरा, ज्वार।
  • तकनीक:
    • सूक्ष्म सिंचाई (माइक्रो इरिगेशन)।
    • जलवायु भविष्यवाणी आधारित खेती।

16. सफेद क्रांति आधारित डेयरी कृषि (Dairy Farming):

  • कृषि के साथ-साथ दुग्ध उत्पादन पर आधारित।
  • उद्देश्य: आय के अतिरिक्त स्रोत का निर्माण।
  • क्षेत्र: गुजरात, पंजाब, हरियाणा।
  • भारत दुग्ध उत्पादन में विश्व में प्रथम स्थान पर है।

17. पारिस्थितिक कृषि (Eco-Farming):

  • पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर की जाने वाली खेती।
  • जैव विविधता, प्राकृतिक संसाधनों और पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित।
  • तकनीक:
    • कृषि वानिकी (Agroforestry)।
    • जैविक कीटनाशकों और प्राकृतिक खाद का उपयोग।

18. उद्यान कृषि (Floriculture and Horticulture):

  • फूलों की खेती: गुलाब, गेंदा, कमल आदि।
  • मसाले और जड़ी-बूटियों की खेती: हल्दी, अदरक, इलायची।
  • लाभ:
    • उच्च मूल्य प्राप्ति।
    • निर्यात में योगदान।

19. सामुदायिक कृषि (Community Farming):

  • इसमें स्थानीय समुदाय सामूहिक रूप से भूमि पर खेती करता है।
  • प्रचलित क्षेत्र: ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में।

20. कृषि वानिकी (Agroforestry):

  • कृषि और वानिकी का सम्मिलित रूप।
  • फसलों के साथ पेड़ों की खेती।
  • लाभ:
    • अतिरिक्त आय।
    • पर्यावरण संरक्षण।

निष्कर्ष:

भारत में कृषि के विविध प्रकार देश की भौगोलिक, जलवायु, और सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप विकसित हुए हैं। इन प्रकारों का मुख्य उद्देश्य उत्पादन बढ़ाना, पर्यावरण संरक्षण करना, और किसानों की आय में सुधार करना है। सतत और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर भारत कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।


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